जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है। एजेंसी ने बुधवार को केंद्र शासित प्रदेश में 9 जगहों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मशहूर कश्मीरी पंडित कवि, लेखक, विद्वान और समाज सेवक सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके 27 साल के बेटे वीरेंद्र कौल के 1990 में हुए अपहरण और बेरहमी से हत्या के मामले के सिलसिले में की गई।
कहां-कहां हुई छापेमारी?
यह तलाशी FIR नंबर 45/1990 के तहत की गई, जो मूल रूप से अनंतनाग जिले के डूरू पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी और अब SIA इसकी जांच कर रही है। नौ जगहों में से छह राजौरी जिले में, दो जम्मू में और एक कश्मीर घाटी में थी। अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी उन संपत्तियों और लोगों को निशाना बनाकर की गई, जिनके बारे में माना जाता है कि वे इस लंबे समय से लंबित दोहरे हत्याकांड की साजिश से जुड़े थे। यह कार्रवाई साढ़े तीन दशक से भी ज्यादा समय बाद दोषियों, संभावित साथियों और बचे हुए सबूतों का पता लगाने की तेज कोशिशों का हिस्सा है।
कौन थे सरवानंद कौल प्रेमी?
सर्वानंद कौल प्रेमी एक सम्मानित साहित्यकार, स्वतंत्रता सेनानी और अनंतनाग के कोकरनाग में सोफ शाली गांव के निवासी थे। उन्हें और उनके बेटे वीरेंद्र को 29-30 अप्रैल 1990 की रात उनके घर से अगवा कर लिया गया था। 1 मई 1990 को उनके शव घर से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक पेड़ से लटके हुए मिले थे। इन हत्याओं ने समुदाय में हड़कंप मचा दिया था और ये कश्मीर में 1990 के दशक की शुरुआत में हुई लक्षित हिंसा (टारगेटेड वायलेंस) के खौफनाक उदाहरणों में से एक हैं।
सर्वानंद कौल ने 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में सक्रिय रूप से भाग लिया था। वे धर्मनिरपेक्ष विचारों और कश्मीरी साहित्य के संवर्धन के लिए जाने जाते थे। उन्होंने पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण का कश्मीरी भाषा में अनुवाद किया था, जो उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान का एक अनूठा उदाहरण है।
1990 के हत्याकांड में अब SIA ने शुरू की कार्रवाई
यह मामला कई सालों तक लगभग ठंडे बस्ते में पड़ा रहा, जब तक कि गृह मंत्रालय के उस निर्देश के बाद इसे फिर से नहीं खोला गया जिसमें उस दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के अनसुलझे मामलों की दोबारा जांच करने को कहा गया था। ताजा तलाशी अभियान SIA की ओर से जांच को निर्णायक चरण तक ले जाने और कश्मीरी पंडितों के पलायन से जुड़ी इस दशकों पुरानी त्रासदी में न्याय दिलाने की एक अहम कोशिश है।
वहीं, आपको बता दें कि 2 दिन पहले ही घाटी के कश्मीरी पंडितों को धमकी भरा पत्र मिला है। इसमें साफ लिखा गया है कि इस बार वे जम्मू में भी नहीं छिप पाएंगे। जरूरत पड़ने पर वहां भी उनका पीछा किया जाएगा।
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