कश्मीर में RSS की पहली एंट्री, भारतीय मजदूर संघ ने पुलवामा में अपना दफ्तर खोला, इसका मकसद क्या है?
कश्मीर में RSS की पहली एंट्री हो गई है। RSS से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने पुलवामा में अपना दफ्तर खोला है। जानकारी के अनुसार, इस इलाके में भारतीय मजदूर संघ के 20 रजिस्टर्ड लेबर यूनियन हैं। आइए जानते हैं कि इस कदम का मकसद क्या है?

कश्मीर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पहली एंट्री देखने को मिली है। हिंसा, आतंकवाद और पत्थरबाजी के नाम से मशहूर पुलवामा के बारसू गांव में RSS से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने अपना दफ्तर खोला है। आपको बता दें कि यह दफ्तर पुलवामा में लेथपोरा की उस जगह से महज 5 किलोमीटर दूर है जहां साल 2019 में एक फिदायीन हमले में देश के 40 जवानों की शहादत हुई थी।
एक मंजिला ऑफिस बनकर तैयार
भारतीय मजदूर संघ का यह ऑफिस जबरवान पहाड़ों के नीचे एक छोटे से शांत गांव में, जिसे कभी अशांति और आतंकवाद का गढ़ माना जाता था, वहां मौजूद है। एक मंजिला इमारत के कुछ कमरे अब बदलाव के मूक गवाह के रूप में खड़े हैं। यह एक मंजिला बिल्डिंग है, जिसमें सिक्योरिटी कैमरे लगे हैं। ऑफिस का कोई साइनबोर्ड या झंडा नहीं है, बस एक छोटा सा साइनबोर्ड है जिस पर "ऑफिस" लिखा है। सिक्योरिटी के लिए बाहर पुलिस वाले तैनात किए गए हैं। बता दें कि यह नया डिविजनल कार्यालय, कश्मीर घाटी में आरएसएस से जुड़े किसी संगठन की पहली सार्वजनिक और स्थायी उपस्थिति है।
2020 में आर्टिकल 370 हटने के बाद से कश्मीर में वर्षों तक चुपचाप काम करने वाले एक संगठन भारतीय मजदूर संघ के लिए, यह सादगी और सोच-समझकर लिया गया फैसला था। हालांकि, अब आम लोगों के लिए अपने दरवाजे खोलने के इसके निर्णय को एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस इलाके में भारतीय मजदूर संघ के 20 रजिस्टर्ड लेबर यूनियन हैं।
क्या है भारतीय मजदूर संघ का मकसद?
इंडिया टीवी से बात करते हुए, कश्मीर डिवीजन के प्रभारी अधिकारी समीर कुचे ने साफ किया कि भारतीय मजदूर संघ एक इंडिपेंडेंट संगठन है जो मुख्य रूप से देश के मजदूरों के अधिकारों, सम्मान और कानूनी हक के लिए काम करता है। पुलवामा जैसे सेंसिटिव इलाके में ऐसे ऑफिस का खुलना और लोगों का जुड़ना यह दिखाता है कि लोग अब इसे राजनीति या धर्म से ऊपर उठकर मजदूरों की भलाई का मामला मान रहे हैं। भविष्य की योजनाएं और संगठन का मुख्य मकसद मजदूरों को उनके कानूनी अधिकार दिलाना और देश के विकास में उनका योगदान पक्का करना है। समीर कुचे ने कहा कि "शुरू में, समाज में कुछ गलत जानकारी थी, जिसका हमें पहले सामना करना पड़ा। लेकिन धीरे-धीरे, जैसे-जैसे जम्मू और कश्मीर बैंक के वर्कर और ऑफिसर हमारे साथ जुड़े, उन्हें एहसास हुआ कि हमारा एकमात्र मकसद पहले भारत का विकास करना है। जैसा कि BMS का नारा है, "हम देश के हित में काम करेंगे, और उस काम के लिए पूरी सैलरी लेंगे।" वर्किंग क्लास देश बनाती है, और हमारे नारे का मतलब है कि हर वर्कर और कर्मचारी देश को विकसित बनाने में योगदान दे, साथ ही यह पक्का करे कि हर वर्कर को सही सैलरी और कानूनी अधिकार सम्मान के साथ मिलें।"
पुलवामा को चुनने का कारण क्या है?
समीर कुचे ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा को चुनने के दो कारण हैं पहला- 2019 में आर्टिकल 370 हटने के बाद हालात काफी बदल गए। पहले, हम रोज पत्थरबाजी और हड़ताल देखते थे, लेकिन 2019 के बाद माहौल शांतिपूर्ण हो गया, और युवा अब पढ़ाई और करियर में बेहतरी पर ध्यान देते हैं। दूसरा- हमारी ज्यादातर जुड़ी हुई यूनियनें साउथ कश्मीर में हैं, और बीच में होने की वजह से नॉर्थ और साउथ कश्मीर दोनों जगह के मजदूरों के लिए वहां पहुंचना आसान हो गया।
समीर कुचे ने कहा- "2019 से पहले, हालात सच में ज्यादा मुश्किल थे, लेकिन आज, जैसा कि मैंने बताया, हमारे साथ 20 से ज्यादा यूनियन और हज़ारों सदस्य जुड़े हुए हैं। ये वर्कर यह भी जानते हैं कि BMS में आने का मतलब है कि कोई उनके धर्म या पॉलिटिक्स के बारे में नहीं पूछता। इसके बजाय, हम पूरी तरह से इस बात पर फोकस करते हैं कि उनकी और उनके साथी वर्कर की सबसे अच्छी सेवा कैसे की जाए।"
BMS का लक्ष्य क्या है?
समीर कुचे ने कहा कि "BMS का लक्ष्य आसान है- हम ऐसे वर्कर हैं जो देश बनाने में योगदान देते हैं, और हम यह पक्का करते हैं कि हमारे वर्कर को उनके कानूनी अधिकार, सम्मान और इज्जत मिले। हमारी सोच है "राष्ट्र पहले, भारत पहले," और हमारा मुख्य मिशन हर वर्कर की भलाई और विकास के लिए काम करना है।"
आपको बता दें कि कश्मीर में आरएसएस की एंट्री एक बड़ी तबदीली मानी जाती है क्यों कि कश्मीर में आरएसएस की छवि और उनकी विचारधारा को लोग पसंद नहीं करते हैं लेकिन आरएसएस की ये एंट्री ये दर्शाति है कि ना सिर्फ कश्मीर के हालात बदल गए हैं बल्कि लोगों की सोच में भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
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