मध्य प्रदेश के देवास जिले से विकास के दावों की पोल खोलने वाली एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां होशियारी और मकोड़िया गांव के बीच शिप्रा नदी पर करीब 7 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बना नया पुल पहली ही तेज बारिश को भी नहीं झेल पाया। बारिश के शुरुआती झोंके में ही पुल का प्रोटेक्शन वर्क ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने करोड़ों की लागत से हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों को कई सालों के लंबे इंतजार के बाद इस नदी पर पुल की सौगात मिली थी, लेकिन पहली ही बारिश ने उनकी खुशियों पर पानी फेर दिया।
घटिया निर्माण का आरोप, अफसरों ने झाड़ा पल्ला
स्थानीय ग्रामीणों ने ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल का काम बेहद जल्दबाजी में और घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग करके किया गया। जब पुल बन रहा था, तब भी ग्रामीणों ने इसकी खराब गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदार इंजीनियरों से शिकायत की थी, लेकिन उनकी एक न सुनी गई। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पानी के तेज बहाव में पुल के आसपास का सुरक्षा हिस्सा बह रहा है। दूसरी तरफ, जल संसाधन विभाग की एसडीओ नेहा दुबे ने पुल को पूरी तरह सुरक्षित बताते हुए दावा किया है कि केवल मिट्टी और प्रोटेक्शन वर्क का कुछ हिस्सा ही बहा है, जिसे जल्द ही ठीक करवा दिया जाएगा।
जांच के घेरे में लापरवाही, प्रशासन सख्त
इस हादसे के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। घटना की सूचना मिलते ही हाटपीपल्या विधायक मनोज चौधरी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने घटिया निर्माण पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने भी तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, लेकिन इस घटना ने सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार और लापरवाही को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
रिपोर्ट- अरविंद चौकसे
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