मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्थित अजयगढ़ के सरकारी कॉलेज की छात्राओं ने कॉलेज के प्रिंसिपल पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों से कैंपस में आक्रोश फैल गया है और तुरंत प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की जा रही है। जानकारी के अनुसार खबर ऐसी है कि अजयगढ़ महाविद्यालय के प्राचार्य पर छात्राओं ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं का आरोप है कि प्राचार्य उन्हें बुरी नजर से देखते हैं और अभद्र व्यवहार करते हैं। साथ ही छात्राओं को अनुचित तरीके से स्पर्श करते हैं। मामले को लेकर छात्र-छात्राओं में काफी नाराजगी देखने को मिली। इसके पहले सुल्तानपुर स्थित एक स्कूल में छात्राओं के साथ अश्लील हरकत करने का गंभीर मामला सामने आया था।
प्राचार्य पर छात्राओं ने लगाया गंभीर आरोप
छात्राओं का आरोप है कि प्रिंसिपल उन्हें बुरी नजर से देखते हैं, अभद्र व्यवहार करते हैं और गलत तरीके से छूते हैं। उनका कहना है कि इन घटनाओं की वजह से कॉलेज में असुरक्षित और खराब माहौल बन गया है। इसके जवाब में दर्जनों छात्राओं ने अजयगढ़ के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के जरिए गवर्नर को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें प्रिंसिपल को नौकरी से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है। ज्ञापन में निष्पक्ष और तय समय-सीमा के भीतर जांच करने और तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
छात्राओं ने दिया अल्टीमेटम
छात्राओं ने अल्टीमेटम दिया है। अगर दो से सात दिनों के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे कैंपस में विरोध-प्रदर्शन करेंगी। खबर है कि अभिभावक भी नाराज हैं और जवाबदेही की मांग में छात्राओं का समर्थन कर रहे हैं। मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा प्रणाली के तहत चलने वाले इस कॉलेज में ऐसी शिकायतों के लिए 'यौन उत्पीड़न सेल' बना हुआ है, फिर भी छात्राओं का कहना है कि पहले की व्यवस्थाएं न्याय दिलाने में नाकाम रही हैं।
कानूनी कार्रवाई की मांग
भारतीय कानून के तहत किसी महिला की मर्यादा को ठेस पहुंचाना (IPC की धारा 354) और शब्दों या इशारों से महिला की मर्यादा का अपमान करना (IPC की धारा 509) संज्ञेय अपराध हैं। पीड़ित महिलाएं संस्थान की यौन उत्पीड़न-रोधी समिति में लिखित शिकायत कर सकती हैं या FIR दर्ज करा सकती हैं। दूसरी जगहों पर ऐसे मामलों में विश्वविद्यालयों ने जांच पूरी होने तक प्रिंसिपलों को सस्पेंड किया है या उनकी जगह दूसरे को नियुक्त किया है। हालांकि, इसके नतीजे अलग-अलग रहे हैं।
छात्राओं ने आंदोलन करने की दी चेतावनी
अब सबकी नजरें जिला प्रशासन और राज्य के उच्च शिक्षा विभाग पर टिकी हैं। तनाव को कम करने के लिए निष्पक्ष जांच, शिकायत करने वालों को बदले की कार्रवाई से सुरक्षा और पारदर्शी बातचीत बहुत जरूरी होगी। अगर प्रशासन देरी करता है तो छात्रों के संभावित विरोध-प्रदर्शन और बढ़ सकते हैं, जिससे अजयगढ़ कॉलेज में कैंपस की सुरक्षा और कामकाज के तौर-तरीकों पर सबका ध्यान और ज्यादा जाएगा।
(इनपुट - अमित सिंह)
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