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दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से समर्थक नाराज, कई पार्षदों ने दिया इस्तीफा, NH-44 पर जाम लगाया

नरोत्तम मिश्रा को पिछले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया है। हालांकि, इससे उनके समर्थक बेहद नाराज हैं और सड़क पर आकर हंगामा कर रहे हैं। इस वजह से एनएच-44 पर जाम लग गया है।

Narottam Mishra- India TV Hindi
Image Source : PTI नरोत्तम मिश्रा

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट में हो रहे उपचुनाव में बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया है। इस सीट पर उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया गया है। हालांकि, पार्टी के इस फैसले से नरोत्तम मिश्रा के समर्थक बेहद नाराज हैं। टिकट कटने के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थक और व्यापारी सड़क पर उतरे और जमकर हंगामा किया। इस वजह से झांसी हाईवे NH-44 पर तकरीबन 2 किलोमीटर का लंबा जाम लग गया। पूरे हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार दिखाई दे रही थी।

दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के विरोध में भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण सहित सभी पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सभी भाजपा पार्षदों ने भी इस्तीफे दे दिए। दतिया की नरोत्तम मिश्रा समर्थक महिलाओं ने कहा, "दादा चिंता मत करना, जान लगा देंगे आपके लिए।" महिला समर्थकों ने नरोत्तम मिश्रा जिंदाबाद के नारे लगाए। धरती पर बैठी महिलाओं ने कहा कि उनके दादा का टिकट कटवा दिया गया।

क्यों कटा नरोत्तम मिश्रा का टिकट

नरोत्तम मिश्रा को 2023 में हुआ विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। राज्य में बीजेपी की लहर के बावजूद पूर्व गृहमंत्री चुनाव हार गए थे। कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने उन्हें हराया था। हालांकि, राजेंद्र भारती को पुराने मामले में सजा हो गई। इस वजह से उनकी सदस्यता रद्द हो गई और अब उपचुनाव हो रहा है। नरोत्तम मिश्रा को दोबारा टिकट देने पर कांग्रेस राजेंद्र भारती के बेटे को उम्मीदवार बना सकती है। नरोत्तम मिश्रा 6 बार विधायक रह चुके हैं। साल 2008 से 2023 तक वह दतिया के विधायक रहे। ऐसे में उनके खिलाफ एंटी इनकंबेंसी भी हो सकती है। ऐसा होने पर बीजेपी को फिर इस सीट पर हार झेलनी पड़ सकती है। संभावना है कि इन्हीं कारणों से बीजेपी ने उनका टिकट काटा है।

नए चेहरे पर दांव खेल रही बीजेपी

मध्य प्रदेश में बीजेपी सत्ता में है और प्रचंड बहुमत के साथ सरकार चला रही है। ऐसे में इस चुनाव का कोई खास असर नहीं होगा। मौजूदा सरकार अपना आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी है। ऐसे में पार्टी युवा नेता को मौका देना चाहती है। हालांकि, नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी नहीं खत्म हुई तो अशुतोष तिवारी के लिए भी जीत हासिल करना आसान नहीं होगा। ऐसे में बीजेपी को अंदरूनी कलह जल्द ही सुलझानी होगी।

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