भोपालः मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव के लिए बीजेपी ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। आशुतोष तिवारी को बीजेपी ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है। बीजेपी की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया है कि केंद्रीय चुनाव समिति ने मध्य प्रदेश के दतिया में होने वाले उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी के नाम पर अपनी स्वीकृत दी है। आशुतोष जल्द ही अपना नामांकन फाइल करेंगे। इससे पहले माना जा रहा है
कौन हैं आशुतोष तिवारी?
आशुतोष तिवारी संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं और वह आरएसएस के पूर्व संभागीय संगठन मंत्री रहे हैं। आशुतोष एमपी हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वह लंबे समय से बीजेपी से जुड़े हुए हैं।
30 जुलाई को होगी वोटिंग
भारत निर्वाचन आयोग ने 6 जुलाई को दतिया की खाली सीट को भरने के लिए उपचुनाव कराने की अधिसूचना जारी की थी। यहां पर नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 13 जुलाई है। 16 जुलाई तक उम्मीदवार नामांकन वापस ले सकेंगे। दतिया में 30 जुलाई को उपचुनाव होगा। चुनाव सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक होगा। मतगणना 3 अगस्त को होगी।
अर्जुन भारती हो सकते हैं कांग्रेस उम्मीदवार
यह उपचुनाव सत्ताधारी BJP और विपक्षी कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई है। कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है। चर्चा है कि कांग्रेस अयोग्य घोषित किए गए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के बेटे अर्जुन भारती को अपना उम्मीदवार बना सकती है।
बता दें कि दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद खाली हुई है। धोखाधड़ी के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें राज्य विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। गौरतलब है कि राजेंद्र भारती ने 2023 के विधानसभा चुनावों में इस सीट से मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था। इस सीट से इस बार नरोत्तम मिश्रा बीजेपी की तरफ से सबसे प्रबल दावेदार थे लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। बीजेपी ने युवा चेहरे आशुतोष तिवारी पर अपना भरोशा जताया है।
राजेंद्र भारती की याचिका खारिज
वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश कांग्रेस के अयोग्य घोषित विधायक राजेंद्र भारती की याचिका खारिज कर दी। उन्होंने 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी करके गैर-कानूनी तरीके से ब्याज का भुगतान पाने के धोखाधड़ी के मामले में अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की थी।