11 जुलाई को आषाढ़ कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि और शनिवार का दिन है। द्वादशी तिथि शनिवार को देर रात 2 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। 11 जुलाई को दोपहर पहले 11 बजकर 4 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 11 जुलाई को योगिनी एकादशी व्रत का पारण भी किया जाएगा। आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते शनिवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
11 जुलाई 2026 का पंचांग
- आषाढ़ कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि- 11 जुलाई 2026 को देर रात 2 बजकर 5 मिनट तक
- कृतिका नक्षत्र- 11 जुलाई 2026 को दोपहर पहले 11 बजकर 4 मिनट तक
- 11 जुलाई 2026 विशेष- योगिनी एकादशी व्रत का पारण
- योगिनी एकादशी पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 02:03 पी एम से 04:42 पी एम
11 जुलाई 2026 का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:41 ए एम से 05:25 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:18 पी एम से 01:10 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:56 पी एम से 03:49 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:19 पी एम से 07:41 पी एम
- अमृत काल- 08:52 ए एम से 10:19 ए एम
- त्रिपुष्कर योग- 06:08 ए एम से 11:03 ए एम
- अमृत सिद्धि योग- 11:03 ए एम से 06:08 ए एम, जुलाई 12
11 जुलाई 2026 का अशुभ समय
- राहुकाल- 09:26 ए एम से 11:05 ए एम
- यमगण्ड- 02:23 पी एम से 04:02 पी एम
- गुलिक काल - 06:08 ए एम से 07:47 ए एम
- दुर्मुहूर्त- 06:08 ए एम से 07:01 ए एम
- बाण चोर- 05:59 पी एम तक
शहरों के अनुसार राहुकाल का समय
- दिल्ली- सुबह 08:59 - 10:43 AM
- मुंबई- सुबह 09:26 - 11:05 AM
- चंडीगढ़- सुबह 08:58 - 10:43 AM
- लखनऊ- सुबह 08:46 - 10:29 AM
- भोपाल- सुबह 09:03 - 10:44 AM
- कोलकाता- सुबह 08:21 - 10:01 AM
- अहमदाबाद- सुबह 09:23 - 11:04 AM
- चेन्नई- सुबह 09:02 - 10:38 AM
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय- सुबह 5: 30 बजे
- सूर्यास्त- शाम 7: 21 बजे
कृत्तिका नक्षत्र
कृत्तिका नक्षत्र आकाशमंडल कुल सत्ताईस नक्षत्रों की श्रेणी में कृत्तिका तीसरा नक्षत्र है। कृत्तिका का अर्थ होता है- कार्य करना। इसका पहला चरण मेष राशि में, जबकि बाकी तीन चरण वृष राशि में आते हैं। लिहाजा मेष और वृष, दोनों राशियों पर कृतिका नक्षत्र का प्रभाव रहता है। कृत्तिका नक्षत्र अग्नि तत्व का प्रतीक भी है, क्योंकि इसके देवता अग्नि देव हैं। साथ ही कृत्तिका नक्षत्र के स्वामी सूर्यदेव हैं और शास्त्रों के अनुसार सूर्यदेव अपने साधकों को ऊर्जा और तेज से परिपूर्ण करते हैं और उनके कार्य बनाने में मदद करते हैं। लिहाजा कृत्तिका नक्षत्र के दौरान सूर्यदेव की उपासना करना भी अच्छा माना जाता है। इसके आलावा कृत्तिका नक्षत्र के दौरान गायत्री मंत्र का पाठ करना भी लाभदायक सिद्ध होता है। गायत्री मंत्र इस प्रकार है-
ॐ भूर्भुव स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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