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बांकीपुर उपचुनाव के लिए बीजेपी ने क्यों बदला उम्मीदवार? कैसे नीरज सिन्हा को मिला टिकट, पढ़ें Inside Story

 Reported By: Nitish Chandra Edited By: Mangal Yadav
 Published : Jul 10, 2026 11:47 pm IST,  Updated : Jul 11, 2026 12:06 am IST

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर चुके बीजेपी के उम्मीदवार अभिषेक कुमार 'बंटी' द्वारा शुक्रवार को अपना नामांकन वापस लेने के बाद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने नीरज कुमार सिन्हा को नया आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है।

अभिषेक कुमार 'बंटी'- India TV Hindi
नीतीश कुमार से मिलते अभिषेक कुमार 'बंटी' Image Source : REPORTER

पटनाः बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक बंटी ने बांकीपुर उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के एक दिन बाद व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए नाम वापस ले लिया है, लेकिन अभिषेक बंटी के नामांकन वापस लेने के पीछे की एक बड़ी वजह चारा घोटाले से उनके परिवार का कनेक्शन को बताया जा रहा है। 

चारा घोटाले से परिवार का कनेक्शन, इसलिए कटा टिकट

सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बंटी के पिता रविन्द्र प्रसाद चारा घोटाले में दोषी थे। अभिषेक सिन्हा के पिता रविंद्र प्रसाद सिन्हा मेसर्स मगध केमिकल्स कॉर्पोरेशन नाम की कंपनी में मैनेजर थे। यह कंपनी चारा घोटाला में शामिल थी। रविंद्र प्रसाद पर अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी बिलों के जरिए सरकारी खजाने से पैसा निकालने का आरोप था।

सीबीआई कोर्ट ने 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के साथ जिन 75 लोगों को दोषी माना था। उनमें रविन्द्र प्रसाद भी शामिल थे। रविन्द्र प्रसाद को 3 साल की सजा सुनाई गई थी। सीबीआई ने इस मामले में 2001 से 2003 के बीच 3 चार्जशीट फाइल की थी। सीबीआई ने इन्हें आरोपी बनाया था। डोरंडा ट्रेजरी केस में अवैध निकासी को लेकर लालू यादव समेत 99 अभियुक्तों पर सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाया था। इसमें लालू समेत 75 आरोपी दोषी करार दिए गए थे। इनमें अभिषेक बंटी के पिता रविन्द्र प्रसाद भी शामिल थे। उन पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगा था।

नामांकन में गलत जानकारी भी दी

सूत्रों के अनुसार, इसके अलावा अभिषेक ने नामांकन में गलत जानकारी भी दी थी। उन्होंने पढ़ाई से जुड़ी कुछ जानकारियां छिपाई थी। अभिषेक ने नॉमिनेशन में खुद को 10वीं पास बताया था, लेकिन उसके रिजल्ट में कुछ गड़बड़ियां पाई गई हैं। ऐसे में भी उसके नॉमिनेशन के रद्द होने की संभावना हो सकती थी। इसीलिए बीजेपी ने कोई रिस्क नहीं लेते हुए नामांकन वापस करवाने का फैसला किया।

अभिषेक कुमार 'बंटी' की तरफ से नामांकन वापस लेने के बाद बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को चुनाव मैदान में उतारने का निर्णय लिया। नीरज ने कहा, "पार्टी लीडरशिप ने मुझे मौका दिया है। मैं उनके काम को आगे बढ़ाऊंगा और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के मार्गदर्शन में काम करूंगा। कोई चुनौती नहीं है। वे सभी बड़े भाई जैसे हैं और मुझे उनका आशीर्वाद मिलेगा। मैं पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर चुनाव लड़ूंगा।"

नीरज कुमार सिन्हा को क्यों मिला टिकट

पटना के रहने वाले नीरज कुमार सिन्हा लगभग 20 साल से बीजेपी से जुड़े हुए हैं। वे 2006 में पार्टी के प्राथमिक सदस्य बने और बूथ व मंडल स्तर पर काम करते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़े। सिन्हा ने अपने संगठनात्मक सफर की शुरुआत नरेंद्र भारती मंडल में बूथ प्रमुख के तौर पर की और बाद में मंडल महामंत्री के रूप में काम किया। उनके संगठनात्मक काम और युवा पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ उनके जुड़ाव को देखते हुए, बीजेपी ने उन्हें बीजेपी युवा मोर्चा का जिला उपाध्यक्ष नियुक्त किया। बीए ग्रेजुएट सिन्हा ऐसे परिवार से आते हैं जिसका बीजेपी की वैचारिक जड़ों से पुराना नाता रहा है। उनके चाचा नरेंद्र भारती जनसंघ के दौर के कार्यकर्ता थे और 1984 में उनका निधन हो गया था। उनके निधन के बाद, उनके योगदान को सम्मान देते हुए स्थानीय मंडल का नाम उनके नाम पर रखा गया।

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