घर को आकर्षक बनाने के लिए लोग अलग-अलग तरह की पेंटिंग और फोटो लगाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार हर तस्वीर का अपना अलग प्रभाव माना गया है। इन्हीं में से एक है उगते सूरज की तस्वीर। इसे सकारात्मक ऊर्जा, नई शुरुआत और तरक्की का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, इसका लाभ तभी माना जाता है जब इसे वास्तु के अनुसार सही स्थान पर लगाया जाए। जानिए घर में उगते सूरज की तस्वीर कहां लगाई जाए, ताकि परिवार के लोगों में उत्साह, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बनी रहे।
पूर्व दिशा सबसे उपयुक्त
वास्तु शास्त्र के अनुसार उगते सूरज की तस्वीर लगाने के लिए पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। सूर्य का उदय इसी दिशा में होता है, इसलिए इसे ऊर्जा, उन्नति और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। अगर किसी कारण से पूर्व दिशा उपलब्ध न हो तो दक्षिण दिशा भी एक बेहतर विकल्प मानी जाती है। वहीं उत्तर और पश्चिम दिशा में सूर्योदय से जुड़ी तस्वीर या पेंटिंग नहीं लगानी चाहिए।
इन जगहों पर लगाना बेहतर
विशेषज्ञों के अनुसार उगते सूरज की तस्वीर ड्रॉइंग रूम, लिविंग एरिया, हॉल या ऑफिस में लगाना अच्छा माना जाता है। इससे घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है और आने वाले लोगों पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। वहीं बेडरूम, खासकर पति-पत्नी के कमरे में इसे न लगाने की सलाह दी जाती।
बच्चों के लिए भी मानी जाती है लाभकारी
उगता सूरत हमेशा आगे बढ़ते रहने को प्रेरित करता है। कुछ वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के स्टडी रूम या पढ़ाई वाले स्थान पर सूर्योदय की तस्वीर लगाने से एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती है। यह पेंटिंग बेहद खूबसूरत और ध्यान आकर्षित करने वाली होती है। तभी तो वास्तु मान्यताओं में इसे आत्मविश्वास बढ़ाने और प्रेरणा से भी जोड़ा जाता है।
चुनें ऐसी तस्वीर
घर में अच्छी क्वालिटी वाली उगते सूरज की तस्वीर ही लगाएं। तस्वीर में सूर्य स्पष्ट दिखाई देना चाहिए और उसका फ्रेम भी सही स्थिति में होना चाहिए। कभी भी धुंधली, फटी हुई या खराब फ्रेम वाली तस्वीर न लगाएं। वास्तु मान्यताओं में ऐसी तस्वीरें शुभ नहीं मानी जाती हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
ये भी पढ़ें: विवाह रेखा खोलती है शादीशुदा जिंदगी के राज, ये 5 निशान देते हैं चेतावनी, जानिए क्या कहता है हस्तरेखा शास्त्र