मध्य प्रदेश में 'PM जीवन ज्योति बीमा योजना' का उठाया गया गलत फायदा, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के जरिए करोड़ों की ठगी
'प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना' पर ठगों की ऐसी नजर पड़ी कि उन्होंने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के जरिए साढ़े 9 करोड़ रुपए की बीमा पॉलिसी लेने का फर्जी वाड़ा कर डाला।

भोपाल: मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना' में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के जरिए साढ़े 9 करोड़ रुपए की बीमा पॉलिसी लेने के फर्जी वाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने पूरे सिस्टम की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में जिंदा लोगों को कागजों में मृत दिखाया गया, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए गए और बीमा कंपनियों से क्लेम की रकम हड़प ली गई। ग्वालियर, मुरैना से लेकर रतलाम और राजस्थान की सीमाओं तक फैले इस संगठित सिंडिकेट के खिलाफ एमपी सीआईडी ने दो एफआईआर दर्ज की हैं।
121 मामलों में सीधी ठगी, साढ़े 9 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का पर्दाफाश
अब तक 121 मामलों में सीधी ठगी का पता चला है, जबकि 482 से अधिक बैंक खाते जांच के दायरे में हैं। सवाल उठता है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का यह खेल बैंक, निकाय और बीमा कंपनियों की नाक के नीचे कैसे चलता रहा।
MP में गरीबों और आम जनता के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना को ही शातिर ठगों ने अपनी काली कमाई का जरिया बना लिया। 'प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना' के तहत साढ़े 9 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। संगठित आपराधिक गिरोह ने जिंदा इंसानों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया और बीमा कंपनियों से लाखों-करोड़ों के क्लेम ऐंठ लिए।
फर्जीवाड़े का यह सिंडिकेट सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं था। गिरोह ने ग्वालियर, मुरैना, रतलाम और प्रदेश के अन्य हिस्सों में विभिन्न बैंकों के भीतर फर्जी नामों से सैकड़ों संदिग्ध खाते खुलवाए। बदले में गरीबों को सरकारी योजनाओं का सपना दिखाया गया, उनके दस्तावेज लिए गए और उनकी जानकारी के बिना अलग-अलग बीमा कंपनियों में सैकड़ों पॉलिसियां ले ली गईं।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना क्या है? कैसे हुआ खेल?
- प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना केंद्र सरकार की आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बीमा कवर प्रदान करने की योजना है।
- 436 के सालाना प्रीमियम पर ₹2 लाख का बीमा कवर मिलता है।
- गिरोह ने शिकार बनाए गए लोगों की 1 या 2 किश्तें खुद जमा करवाईं।
- बीमा लेने के 1 महीने से 1 साल के भीतर बीमित व्यक्ति को प्राकृतिक मृत बता दिया गया।
- नगरीय निकायों के कर्मचारियों से मिलीभगत कर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए गए।
- क्लेम की पूरी रकम गिरोह के ही नामांकित व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर करवाई गई।
फर्जीवाड़ा कितना गहरा? एमपी सीआईडी ने अब तक 2 एफआईआर दर्ज की
फर्जीवाड़े की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ही परिवार के दो से तीन सदस्यों की मौत कभी एक ही हफ्ते में तो कभी एक महीने के भीतर दर्शाई गई। हद तो यह रही कि बीमित व्यक्ति का पता कहीं और था, मृत्यु किसी दूसरे स्थान पर दिखाई गई और मृत्यु प्रमाण पत्र किसी तीसरे ही स्थान से जारी करवा लिया गया।
मामले में एमपी सीआईडी ने अब तक 2 एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें 121 क्लेम रिकॉर्ड में सीधे फर्जीवाड़े की पुष्टि हो चुकी है। वहीं 482 से अधिक संदिग्ध खातों की गहनता से जांच की जा रही है।
इस पूरे खेल का पर्दाफाश कैसे हुआ?
- अलग-अलग लोगों के बैंक खातों और बीमा फॉर्म में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज मिला।
- अधिकतर मामलों में अलग-अलग बीमा धारकों की पॉलिसियों में एक ही व्यक्ति को नॉमिनी बनाया गया था।
- मौतों के इस असामान्य पैटर्न और खातों में एक जैसी जानकारियों से पुलिस और एजेंसियों का शक गहराया।
- बैंकों ने शुरुआती स्तर पर न तो एक समान मोबाइल नंबरों पर ध्यान दिया और न ही संदिग्ध खातों की जांच की।
कई खातों में एक ही ई-मेल आईडी
- प्रीति शाक्य, पुष्पा, सावित्री वर्मा, गिरजा, उषा बाथम, रिंकू की ई-मेल आईडी ilovemyindia091@gmail.com एक
- लक्ष्मी बाई, राम वरण, कदम सिंह, पिंकी की ई-मेल आईडी r.jain11.2.89@gmail.com एक
- राजवीर मोगिया, इंडर सिंह रावत, जनवेद, मुन्नालाल कुशवाह की ई-मेल आईडी js5690671@gmail.com एक
- रवीना आदिवासी, करन सिंह राजावत की ई-मेल आईडी karansinghhrajawat627@gmail.com एक
- केदार नाथ, ऋषिकेश सिंह की ई-मेल आईडी nkedar545@gmail.com एक
- ममता मोगिया, गोपाल आदिवासी की ई-मेल आईडी dk8319696@gmail.com एक
कई खातों में एक ही मोबाइल नंबर
- रामपति आदिवासी एवं बल्लू भास्कर के केवाईसी में एक ही मोबाईल नंबर 9752641xxxx अंकित
- अमित सिंह और रेशमा के के.वाई.सी में एक ही मोबाईल नंबर 971362xxxx अंकित
- फहीम, रामदास कुशवाह रतराम कुशवाह और नरेश गोदिया के के.वाई.सी में एक ही मोबाईल नम्बर 951665xxxx अंकित
- विकास गोस्वामी खाता धारक, रामबीर और प्रदीप कुशवाह के के.वाई.सी में भी 887893xxxx एक ही मोबाईल नंबर अंकित
- रवि जाटव, राजेश जाटव, बीरेन बघेल एक मोबाईल नम्बर 835996xxxx अंकित
गिरोह ने बेहद शातिर रणनीति अपनाई
ठगी की रकम को ठिकाने लगाने और कानून से बचने के लिए गिरोह ने बेहद शातिर रणनीति अपनाई थी। बैंक खाते मध्य प्रदेश के ग्वालियर, चंबल और मुरैना में खुलवाए गए, लेकिन जैसे ही बीमा क्लेम का पैसा खातों में आया, उसे एमपी और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों जैसे रतलाम, सवाई माधोपुर और श्रीगंगानगर के एटीएम से तुरंत नकद निकाल लिया गया ताकि पुलिस नेटवर्क तक न पहुंच सके।
- रतलाम स्थित फेडरल बैंक के 62 खातों में से ढाई करोड़ रुपए क्लेम किए गए।
- 121 पॉलिसी धारकों में से 28 की मृत्यु प्रमाण पत्र राजस्थान के सवाई माधोपुर से।
- 13 नगर निगम ग्वालियर ,07 मालनपुर भिंड 06 ग्राम लेचौरा तहसील गोहद 04 ग्राम पार्वती बड़ौदा जिला शिवपुरी 01 कैलारस मुरैना से जारी किए गए।
एक ही पते पर कई खाते
जैन बगीची रामनगर मुरैना मध्य प्रदेश के पते पर 12 बैंक खाते, थाटीपुर ग्रिड के ग्वालियर के पते पर 12 बैंक खाते, गायत्री कॉलोनी मुरैना के पते पर 09 बैंक खाते, नारायण विहार कॉलोनी गोले का मंदिर के पते पर 03 बैंक खाते पाये गये।
जांच का दायरा दूसरे राज्यों तक फैला
जांच का दायरा अब मध्य प्रदेश से निकलकर दूसरे राज्यों तक फैल चुका है। सीआईडी ने जांच को आगे बढ़ाते हुए अब तक इंदौर की पीपल्याहाना शाखा से 59 खातों के फॉर्म, केवाईसी और लेन-देन के स्टेटमेंट जब्त किए हैं। इसके अलावा बेंगलुरु स्थित पंजाब नेशनल बैंक की रामानगरम शाखा और छिंदवाड़ा छत्तीसगढ़ से जुड़े 3 बीमा धारकों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
इससे पहले खबर सामने आई था कि ग्वालियर में भाजपा नेता के NGO खाते से 21 करोड़ की साइबर ठगी हुई थी और 15 लेयर्स में मनी ट्रेल छिपाया गया था।
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