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800 रुपये घूस लेते पकड़ा, 19 साल बाद कोर्ट ने कर दिया बरी; आखिरकार न्याय मिला या मजाक?

800 रुपये रिश्वत में पकड़े गए केंद्र सरकार के एक पूर्व कर्मचारी को 19 साल बाद क्लीन चिट मिली है। 19 साल तक केस चलने के बाद विशेष CBI कोर्ट ने अरविंद सावंत को बरी कर दिया है।

पूर्व सरकारी कर्मचारी...- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV पूर्व सरकारी कर्मचारी 800 रुपये की रिश्वत मामले में 19 साल बाद बरी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोई मुकदमा कितना लंबा खिंच सकता है, इसकी बानगी ठाणे की एक विशेष CBI कोर्ट से जुड़े एक मामले में साफ दिखाई देती है। दरअसल, CBI कोर्ट ने 800 रुपये रिश्वत लेने के आरोपी केंद्र सरकार के एक पूर्व कर्मचारी को 19 साल बाद बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि रिश्वत की मांग का पुख्ता सबूत न होने के कारण मात्र करेंसी नोटों की बरामदगी उसे दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। विशेष न्यायाधीश डी. एस. देशमुख ने गुरुवार को अरविंद मोतीराम सावंत को बरी कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

अरविंद सावंत अगस्त 2006 में नवी मुंबई के सीबीडी बेलापुर स्थित रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) के कार्यालय में लिपिक के रूप में कार्यरत थे। प्रॉसिक्यूटर पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए एक प्राइवेट कंपनी के गठन दस्तावेजों और गठन के मूल नियम की प्रमाणित प्रतियां तत्काल प्राप्त करने के लिए आरओसी से संपर्क किया था। आरोप था कि अरविंद सावंत ने इस प्रोसेस में तेजी लाने के लिए 1,000 रुपये की मांग की थी, जिसे बाद में घटाकर 800 रुपये कर दिया गया।

कैसे निर्दोष साबित हुआ क्लर्क?  

सूचना मिलने पर CBI ने 22 अगस्त 2006 को जाल बिछाया और आरोपी से "रंगे हाथ" नोट बरामद किए। हालांकि, जिरह के दौरान, बचाव पक्ष ने यह साबित कर दिया कि आरोपी प्रमाणित प्रतियां जारी करने के लिए अंतिम हस्ताक्षरकर्ता नहीं था और उसके पास आरओसी के पास मौजूद दस्तावेजों को जारी करने का अधिकार नहीं था।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा, "अगर किसी आरोपी से रंगे हाथ पैसे बरामद होते हैं, लेकिन उससे पहले रिश्वत मांगने का पक्का और भरोसेमंद सबूत नहीं है या वह सबूत पर्याप्त नहीं है, तो केवल पैसे की बरामदगी के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।" अदालत ने अरविंद सावंत को सभी आरोपों से बरी कर दिया। 

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