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"दादा जो चाहते थे, नहीं हुआ", अजित पवार को याद कर भावुक हुईं सुप्रिया सुले, जानें क्या कहा?

मेरे भाई को गुज़रे पांच महीने हो चुके हैं। अब हमारा परिवार धीरे-धीरे इस दुख से उबर रहा है। दादा जो चाहते थे वो हुआ नहीं। अजित पवार को याद कर भावुक हुईं सुप्रिया सुले। जानें क्या क्या कहा?

अजित पवार को याद कर भावुक हुईं सुप्रिया सुले- India TV Hindi
Image Source : REPORTER अजित पवार को याद कर भावुक हुईं सुप्रिया सुले

 

दिल्ली में जंतर मंतर पहुंची सुप्रिया सुले मीडिया से मुखातिब थीं। उन्होंने अजित पवार को याद  करते हुए कहा, “मेरा भाई अब हमारे बीच नहीं है। इसलिए मेरे भाई को लेकर या उनके नाम पर चल रही तमाम चर्चाओं पर अब पूर्ण विराम लग चुका है। मेरे भाई को गुज़रे पांच महीने हो चुके हैं। अब हमारा परिवार धीरे-धीरे इस दुख से उबर रहा है। मेरे भाई की आखिरी इच्छा थी कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुट एक हो जाएं और मिलकर राज्य तथा देश की सेवा करें। उनकी इस अंतिम इच्छा को पूरा करने की हमारी पूरी तैयारी थी।

अजित पवार को याद कर भावुक हुईं सुप्रिया सुले
अजित पवार को याद करते हुए सुप्रिया सुले भावुक हो गईं और कहा, दादा के रहते भी हमारी यही भावना थी कि दोनों एनसीपी एक हो जाए और आज उनके जाने के बाद भी यही भावना है। लेकिन दूसरी ओर से अब ऐसी कोई सकारात्मक भावना दिखाई नहीं दे रही है। इसलिए मैंने और हमारे संगठन ने इस विषय को पूरी तरह समाप्त मान लिया है। अजित पवार को लेकर सुप्रिया सुले ने कई बातें याद कीं। 

जिस दिन दादा का निधन हुआ, उसी दिन हमारे कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस विषय का उल्लेख किया। लेकिन सामने वाले पक्ष ने यह कह दिया कि ऐसी कोई बात या ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं। इससे हमें बेहद दुख और पीड़ा हुई। एक तरफ हमने अपना भाई खोया था और दूसरी तरफ हम उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने का प्रयास कर रहे थे, क्योंकि यह प्रस्ताव स्वयं मेरे भाई का था।

हम स्वाभिमानी लोग हैं और...

सुप्रिया सुले ने कहा कि इसी वजह से हमने उसी दिन इस विषय को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। हम स्वाभिमानी लोग हैं और अपने स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं करेंगे। मेरा भाई अब इस दुनिया में नहीं है। जिस दिन उनका निधन हुआ और उसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेताओं के बयान मैंने देखे, तब मुझे स्पष्ट हो गया कि दादा की अंतिम इच्छा पूरी करने की उनकी कोई मंशा नहीं है। इसलिए मैंने उसी समय इस विषय पर पूर्ण विराम लगा दिया। उसके बाद से हमारा पूरा ध्यान राज्य और देश की सेवा करने पर है।”