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'बीजेपी से एक करोड़ रुपये लेकर समर्थन दे दिया', उद्धव और राज ठाकरे में फिर शुरू हुई दूरी?

चंद्रपुर महानगरपालिका मेयर चुनाव में बीजेपी की जीत पर राज ठाकरे की पार्टी ने उद्धव ठाकरे गुट पर एक-एक करोड़ रुपये लेकर समर्थन देने का आरोप लगाया। शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप खारिज किए। विवाद से महाराष्ट्र की राजनीति में फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिले हैं।

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Image Source : FILE PHOTO मुंबई में एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे।

चंद्रपुर: महाराष्ट्र के चंद्रपुर महानगरपालिका में मेयर चुनाव के बाद सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीजेपी के उम्मीदवार ने मेयर पद जीत लिया, लेकिन इस जीत के पीछे उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) का समर्थन बताया जा रहा है। राज ठाकरे की मनसे ने इसे ‘खोखे की राजनीति’ करार देते हुए उद्धव गुट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मनसे का दावा है कि उद्धव गुट के पार्षदों ने बीजेपी से पैसे लेकर समर्थन दिया।

'शिवसेना यूबीटी के नगरसेवकों को दिए गए पैसे'

मनसे नेता और प्रवक्ता संदीप देशपांडे ने कहा, 'मुझे मेरे विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि जो नगरसेवक बीजेपी के पक्ष में गए, उन्हें एक-एक करोड़ रुपये दिए गए, साथ ही और भी ऑफर दिए गए। चंद्रपुर में उद्धव ठाकरे गुट (यूबीटी) के जो पार्षद गए, उन्हें एक करोड़ और निर्दलीय पार्षद को 50 लाख रुपये दिए गए। ये मेरी जानकारी है और इसकी जांच होनी चाहिए।'

उद्धव गुट ने आरोपों को सिरे से खारिज किया

उद्धव ठाकरे गुट ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए मनसे पर पलटवार किया। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा, 'राज ठाकरे और मैं मिलते रहते हैं, लेकिन चंद्रपुर के मामले में उद्धव जी की कोई भूमिका नहीं है। यह सिर्फ स्थानीय स्तर का फैसला था। जिन्होंने पैसे लेने का आरोप लगाया है, क्या वे वहां बैग गिनने बैठे थे? क्या उन्हें कमीशन मिला था? जिसने गंदगी की है, उसे जवाब देना होगा, लेकिन शिवसेना को दोष देना बंद करें।'

पिछले महीने ही दोनों भाई थे एक मंच पर

बता दें कि पिछले महीने ही उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ मंच साझा करते नजर आए थे। दोनों ने मिलकर मुंबई समेत कई जगहों पर नगरपालिका चुनाव भी लड़े थे। ऐसे में चंद्रपुर की इस घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या दोनों भाइयों के बीच सब कुछ ठीक है या अंदरखाने मतभेद शुरू हो गए हैं?

बीजेपी ने चंद्रपुर में जुटा लिया था बहुमत

चंद्रपुर महानगरपालिका में कुल 76 पार्षद हैं। बीजेपी के पास अपने दम पर बहुमत नहीं था, लेकिन उद्धव गुट के कुछ पार्षदों के समर्थन से बीजेपी का मेयर चुना गया। मनसे का कहना है कि यह समर्थन ‘पैसे के लेन-देन’ से हुआ, जबकि उद्धव गुट इसे ‘स्थानीय राजनीतिक समीकरण’ बता रहा है।अभी तक दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मनसे ने इस मामले की जांच की मांग की है, जबकि शिवसेना (यूबीटी) इसे ‘राजनीतिक साजिश’ करार दे रही है।

पूरे महाराष्ट्र की सियासत पर होगा असर?

माना जा रहा है कि चंद्रपुर की यह सियासी आग अब पूरे महाराष्ट्र की राजनीति को प्रभावित कर सकती है। इस घटना के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे में दूरी बढ़ सकती है, हालांकि शिवसेना के बंटवारे के बाद वे लंबे समय के बाद एक मंच पर नजर आए थे। अब आगे देखना यह है कि यह घमासान कितना बढ़ता है और दोनों गुट इस पर क्या रुख अपनाते हैं।