मुंबई को हर साल मॉनसून में डूबने से बचाने के लिए मुंबई महानगरपालिका (BMC) दावों और विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। हर साल नालों की सफाई के लिए करोड़ों रुपये के टेंडर निकाले जाते हैं और बड़े-बड़े ठेकेदारों को इसका काम सौंपा जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल जुदा और बेहद शर्मनाक है। मुंबई के वडाला इलाके से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने बीएमसी के प्रशासन और ठेकेदारों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बच्चों से मजदूरी क्यों?
वडाला में चल रहे नाला सफाई के काम में बड़े पैमाने पर बाल मजदूरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बीएमसी हर साल छोटे-बड़े नालों की सफाई के लिए जनता के टैक्स का करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाती है। नियम के मुताबिक, ठेकेदारों को आधुनिक मशीनों और वयस्क व प्रशिक्षित मजदूरों के जरिए सेफ्टी गियर के साथ यह सफाई करानी होती है। लेकिन वडाला में कानून और इंसानियत दोनों की धज्जियां उड़ती दिखीं। स्कूल जाने की उम्र में ये मासूम बच्चे बिना किसी सुरक्षा उपकरण जैसे- ग्लव्स, बूट या मास्क के ही जहरीली गैसों और खतरनाक कचरे से भरे नालों में उतरकर गाद साफ करने को मजबूर हैं।
बाल श्रम दंडनीय अपराध
गौर करने वाली बात ये है कि भारत में बाल श्रम पूरी तरह से प्रतिबंधित और एक दंडनीय अपराध है। खासकर नालों की सफाई जैसे खतरनाक और जानलेवा काम में बच्चों को धकेलना सीधे तौर पर उनके मानवाधिकारों और कानून का उल्लंघन है। नालों में मौजूद जहरीली गैसें और कचरा इन बच्चों को गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकते हैं। इस गंभीर मामले ने बीएमसी के निगरानी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत में 14 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी दुकान, होटल, फैक्ट्री या घर में काम करवाना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। इस उम्र के बच्चों का पहला अधिकार सिर्फ और सिर्फ स्कूल जाना और पढ़ाई करना है। उन्हें सिर्फ स्कूल के बाद अपने परिवार के छोटे-मोटे कामों में हाथ बंटाने या बाल कलाकार के रूप में काम करने की छूट है, लेकिन इससे उनकी पढ़ाई का नुकसान नहीं होना चाहिए।
ये भी पढ़ें-
निर्माण के दौरान ही दरक गया 16 करोड़ रुपये का पुल, VIDEO में देखें लापरवाही का मंजर
यमुना एक्सप्रेसवे पर धू-धू कर जली जैगवार कार, मथुरा-वृंदावन जा रहे 4 लोगों की बाल-बाल बची जान; देखें VIDEO