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आश्रमशाला में करीब 100 छात्रों के आधे सिर मुंडवा कर छोड़े, फोटो वायरल हुई तो नींद से जगाकर रात भर काटे बाल

चंद्रपुर जिले की एक आश्रमशाला में करीब 100 बच्चों के आधे सिर मुंडवा कर छोड़ दिए गए। हालांकि जब इसके फोटो वायरल होने लगे तो बच्चों को जगाकर रात भर उनके बाल काटे गए। घटना के बाद अब मामले की जांच की मांग की जा रही है।

बच्चों के आधे बाल काटकर छोड़े।- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT बच्चों के आधे बाल काटकर छोड़े।

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां चिमूर तहसील के जांभुलघाट स्थित सरकारी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक आश्रमशाला में विद्यार्थियों के बाल अजीब ढंग से काट दिए गए। आरोप है कि शनिवार को बाल काटने के दौरान कई विद्यार्थियों के सिर का आधा हिस्सा ट्रिमर से काट दिया गया और उन्हें अगले दिन बाकी बाल काटने की बात कहकर छोड़ दिया गया। वहीं आधे मुंडे सिर वाले विद्यार्थियों की तस्वीरें सामने आते ही आश्रमशाला प्रशासन में हड़कंप मच गया और रात में ही बच्चों के बाल काटने की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई।

बच्चों के आधे बाल काटकर छोड़े

जानकारी के अनुसार जांभुलघाट आश्रमशाला में पहली से 11वीं कक्षा तक करीब 572 विद्यार्थी रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विद्यार्थियों के सिर में डैंड्रफ होने की समस्या का हवाला देते हुए बाल काटने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात सामने आई है। शनिवार दोपहर करीब 3 बजे विद्यार्थियों के बाल काटने का सिलसिला शुरू हुआ। आरोप है कि बच्चों को इधर-उधर जाने से रोकने के लिए कुछ विद्यार्थियों के सिर का आधा हिस्सा पहले ही ट्रिमर से काट दिया गया। वहीं अब आधे मुंडे सिर वाले विद्यार्थियों की तस्वीरें वायरल होने के बाद मामला अचानक चर्चा में आ गया।

दोबारा रात भर चला बाल काटने का सिलसिला

वहीं मामला विवादों में घिरा तो रात करीब 11 बजे विद्यार्थियों के बाल दोबारा काटे जाने लगे। आरोप है कि उस समय कई बच्चे सोने की तैयारी कर रहे थे, जबकि कुछ विद्यार्थी सो भी चुके थे। इसके बावजूद बाल काटने का सिलसिला सुबह करीब 4 बजे तक जारी रहा। इस दौरान करीब 80 से 100 विद्यार्थियों के बाल काटे जाने की बात सामने आ रही है। सवाल यह है कि यदि बाल काटना विद्यार्थियों की स्वच्छता के लिए आवश्यक था, तो यह प्रक्रिया दिन के समय व्यवस्थित तरीके से क्यों नहीं की गई? बच्चों के सोने के समय तक इंतजार करने की नौबत क्यों आई?

आश्रम के अधीक्षक ने दी सफाई

वहीं मामले में आश्रमशाला के अधीक्षक का स्पष्टीकरण भी सवालों को खत्म करने के बजाय कई नए सवाल खड़े कर रहा है। अधीक्षक के अनुसार विद्यार्थियों के सिर में डैंड्रफ होने के कारण बाल काटने का निर्णय लिया गया था। बच्चे बाल कटवाने के दौरान इधर-उधर न जाएं, इसलिए पहले आधे बाल काटे गए। बाद में तस्वीरें वायरल होने के बाद रात में विद्यार्थियों के बाकी बाल काटे गए। गौरतलब है कि इसी आश्रमशाला में इससे पहले विद्यार्थियों को बासी भोजन दिए जाने और उससे तबीयत बिगड़ने का मामला भी सामने आया था। अब बाल काटने के प्रकरण ने आश्रमशाला की प्रशासनिक व्यवस्था, निगरानी और विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं सम्मान को लेकर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

"हर दो महीने में बच्चों की कटिंग की जाती है। बारिश के दिन थे तो हमने ध्यान नहीं दिया, अभी गर्मी के दिन हैं। बच्चे खेलते हैं, बाल नहीं धोते, ऐसे में डैंड्रफ होने का खतरा रहता है, खुजली होती है, बच्चों के कटिंग के पीछे यही मकसद था। कल हमने कटिंग की शुरुआत की। छात्र इधर-उधर न भटकें इसलिए आधी कटिंग की गई। बाकी बच्चों को भी ट्रिमर लगाने का काम जारी था, लेकिन ट्रिमर की चार्जिंग खत्म हो गई। नाई ने कहा कि बाकी बाद में करेंगे, लेकिन आधे मुंडन किए बच्चों के फोटो वायरल हो गए। मुझे ऑफिस से कॉल आया की तुरंत बच्चों के बाल लेवल कर दो, इसीलिए रात को बाल काटने पड़े। मेरा कोई गलत मकसद नहीं था।"
-प्रशांत मेश्राम, अधीक्षक, आश्रम स्कूल

अभिभावकों ने की जांच की मांग

अभिभावकों ने आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल आश्रमशाला का दौरा कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। विद्यार्थियों के बयान स्वतंत्र रूप से दर्ज करने, बाल काटने की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की जांच करने तथा इस निर्णय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठ रही है। (इनपुट- मिलिंद डिंडेवार)

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