तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सरकार ने मुस्लिम कर्मचारियों को 2 मार्च से 30 मार्च तक रमजान के दौरान दफ्तर से एक घंटा पहले निकलने की अनुमति दी है। सरकार ने इन राज्यों में मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों को रमजान के दौरान शाम 4 बजे काम छोड़ने की अनुमति दी है। तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के इस फ़ैसले के बाद महाराष्ट्र में भी सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अबू आजमी और AIMIM के नेता वारिस पठान ने भी महाराष्ट्र सरकार से ऐसे ही फैसले की मांग की है।
क्या बोले दोनों नेता?
महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अबू आज़मी और AIMIM के नेता वारिस पठान ने भी महाराष्ट्र सरकार से मांग की है की तेलंगना सरकार के फ़ैसले को महाराष्ट्र में भी लागू करना चाहिए और असेंबली सेशन के दौरान विधायकों को जल्दी फ्री किया जाना चाहिए ताकि वो रमजान के दिनचर्या को ठीक से निभा सके और अपने अल्लाह से महाराष्ट्र की उन्नति के लिए दुआ कर सके।
महाराष्ट्र में हिंदूवादी सोच की सरकार- नितेश राणे
तेलंगाना सरकार के इस फैसले के बाद महाराष्ट्र में शिवसेना और बीजेपी इस फैसले को तुष्टिकरण की राजनीति बता रही है। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने कहा- "महाराष्ट्र में हिंदूवादी सोच की सरकार है। यहां कोई भी तुष्टिकरण की राजनीति नहीं करेगा और करना भी नहीं चाहिए। जैसे की बाक़ी बच्चो को संडे को छुट्टी होती है तो मदरसा को शुक्रवार को छुट्टी क्यों मिलना चाहिए। क्या हमारे देश में अलग पाकिस्तान है क्या? या फिर यहां अलग इस्लाम राष्ट्र है। ये सारा चीज़ हमारे देश और हमारे राज्य में हम नहीं सहेंगे।"
क्या है तेलंगाना सरकार का फैसला?
तेलंगाना सरकार ने रमजान के महीने में मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान के महीने के दौरान एक घंटे पहले दफ्तर या स्कूल से बाहर निकलने की छूट होगी। सरकारी आदेश में कहा गया है कि यह छूट 2 मार्च से 31 मार्च 2025 तक लागू रहेगी। यह आदेश सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ कॉन्ट्रैक्ट, आउटसोर्सिंग, बोर्ड और पब्लिक सेक्टर के मुस्लिम कर्मचारियों पर भी लागू होगा।
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