बॉस की फोटो लगाई, फर्जी सिम चलाया और करोड़ों उड़ाए! Boss स्कैम को अंजाम देने वाले साइबर ठगों का खेल बेनकाब
मुंबई पुलिस ने Boss स्कैम को अंजाम देने वाले साइबर ठगों का खेल बेनकाब किया है। पुलिस ने दो आरोपियों को बिहार और झारखंड से पकड़ा है। पुलिस ने ठगी के जिस तरीके का खुलासा किया है उसके बारे में जानकर हर कोई हैरान है।

मुंबई के दक्षिण साइबर पुलिस थाने ने CEO/BOSS फ्रॉड मामले की जांच करते हुए बिहार और झारखंड से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी फर्जी दस्तावेजों और गलत KYC के जरिए सिम कार्ड उपलब्ध कराकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह की मदद कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 161 एयरटेल सिम कार्ड, मोबाइल फोन, मेगाफोन और सिम एक्टिवेशन में इस्तेमाल होने वाला POCO मोबाइल फोन बरामद किया है।
कैसे की गई ठगी?
पुलिस के मुताबिक, 26 फरवरी 2026 को 83 वर्षीय शिकायतकर्ता को WhatsApp कॉल के जरिए संपर्क किया गया था। आरोपी ने खुद को कंपनी का डायरेक्टर बताकर शिकायतकर्ता को विश्वास में लिया और कंपनी के नाम पर सिम कार्ड उपलब्ध कराने के बहाने करीब 48.60 लाख रुपये की ठगी की। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
बिहार के सिवान से एक्टिवेट हुआ था नंबर
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शिकायतकर्ता से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर महाराष्ट्र में जारी नहीं हुआ था, बल्कि बिहार के सिवान से एक्टिवेट कराया गया था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि जिस नंबर से शिकायतकर्ता को फोन किया गया था, वह रिकॉर्ड में एक आर्मी पर्सनल के नाम पर था। पुलिस ने जब उस आर्मी पर्सनल से पूछताछ की तो पता चला कि उसका इस फ्रॉड से कोई लेना-देना नहीं था, बल्कि वह खुद सिम कार्ड से जुड़े फर्जीवाड़े का शिकार हुआ था।
पुलिस के मुताबिक, आर्मी पर्सनल अपना मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के लिए आरोपी की सिम कार्ड की दुकान पर गया था। उसने नंबर पोर्ट कराने के लिए अपने KYC दस्तावेज आरोपी को दिए। आरोपी ने उसे बताया कि KYC में कुछ दिक्कत होने के कारण नंबर पोर्ट नहीं हो पा रहा है। इसी दौरान आरोपी ने उसके KYC दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम पर एक नया सिम कार्ड जारी करा लिया, जिसका बाद में साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किया गया।
ऐसे होता था Boss स्कैम
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में फर्जी सिम के साथ-साथ कंपनी के अधिकारियों की पहचान का भी दुरुपयोग किया जाता था। साइबर ठगी करने वाले आरोपी ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म से कंपनी के डायरेक्टर, मालिक या वरिष्ठ अधिकारी की तस्वीर हासिल करते थे और उस तस्वीर को नए सिम नंबर की WhatsApp DP पर लगा देते थे। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियों को उसी नंबर से WhatsApp कॉल या मैसेज कर खुद को कंपनी का डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी बताया जाता था। विश्वास में लेने के बाद कर्मचारियों से अलग-अलग बहानों से पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे। पुलिस के मुताबिक, फरवरी में दर्ज 48.60 लाख रुपये की ठगी के मामले में भी इसी तरह का तरीका अपनाया गया था।
साइबर ठगी करने वालों को बेचे गए सिम कार्ड
तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने पहले आरोपी आमिर चांद मोहम्मद खान, उम्र 22 वर्ष, निवासी रघुनाथपुर, सिवान, बिहार को गिरफ्तार किया। वह एयरटेल सिम डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर काम करता था। पूछताछ में सामने आया कि उसने कई सिम कार्ड दूसरे आरोपी सूरज कुमार प्रदीप कुमार साव उर्फ विशाल, निवासी कुम्हारधुबी, धनबाद, झारखंड को उपलब्ध कराए थे। सूरज ने आगे इन सिम कार्ड को साइबर ठगी करने वालों को बेच दिया।
पुलिस ने सूरज को झारखंड से गिरफ्तार किया और उसके पास से बड़ी संख्या में सिम कार्ड बरामद किए। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल देशभर में दर्ज कम से कम 9 साइबर अपराधों में किया गया है। NCRP पोर्टल पर दर्ज इन मामलों के तार महाराष्ट्र, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से जुड़े हैं।
कई राज्यों में फैला ठगी का नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में जिस बैंक अकाउंट में ठगी की रकम ट्रांसफर कराई गई थी, वह कोलकाता, पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति के नाम पर था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उस बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किसने और किस नेटवर्क के जरिए किया। जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल तमिलनाडु, नई दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में इसी तरह की साइबर ठगी में किया गया। पुलिस को आशंका है कि ऐसे कई और मामलों में भी इन दोनों की भूमिका सामने आ सकती है। बता दें कि इससे पहले अहमदाबाद पुलिस ने भी जानकारी दी थी कि BOSS SCAM के मामले में पश्चिम बंगाल से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
ठगी के पुराने केस से भी जुड़े तार
पुलिस के मुताबिक, कुछ दिन पहले मुंबई पुलिस ने इसी तरह के CEO/BOSS फ्रॉड मॉडल से जुड़े एक बड़े मामले को सुलझाया था, जिसमें एक बड़ी कंपनी के फाइनेंस मैनेजर से करीब 10 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। उस मामले में भी फर्जी सिम का इस्तेमाल किया गया था और जांच में सामने आया था कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक ने उस मामले में भी ठगी करने वालों को सिम कार्ड उपलब्ध कराया था। पुलिस अब दोनों मामलों के कनेक्शन की जांच कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
पुलिस ने की लोगों से अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी अनजान नंबर से WhatsApp कॉल या मैसेज आने पर व्यक्ति की पहचान की पुष्टि किए बिना कोई वित्तीय लेन-देन न करें। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर संपर्क करें। साथ ही Sanchar Saathi Portal के जरिए यह भी जांचें कि उनके नाम पर कितने मोबाइल सिम कार्ड जारी किए गए हैं।
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