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साइबर क्राइम ब्रांच ने 'BOSS SCAM' का किया खुलासा, चीन-पाकिस्तान से जुड़े तार; 10 हजार से अधिक डिवाइस किए गए सुरक्षित

 Reported By: Nirnay Kapoor Written By: Amar Deep
 Published : Aug 18, 2026 05:17 pm IST,  Updated : Aug 18, 2026 05:17 pm IST

अहमदाबाद पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम के गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इनके तार चीन और पाकिस्तान से जुड़े थे। जांच में पता चला है कि ये लोग कंपनियों के बॉस स्तर के लोगों को स्कैम में फंसाते थे।

साइबर फ्रॉड से जुड़े नेटवर्क का फंडाफोड़।- India TV Hindi
साइबर फ्रॉड से जुड़े नेटवर्क का फंडाफोड़। Image Source : ANI

अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने हाई-प्रोफाइल 'BOSS SCAM' साइबर क्राइम मामलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने एक बड़े इंटरनेशनल नेटवर्क का खुलासा किया जो पाकिस्तान और चीन में बैठे लोगों को साइबर फ्रॉड के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया करा रहा था। CP अनुपम सिंह गहलोत ने बताया कि आरोपी पिछले 4-5 सालों से यह काम कर रहे थे। फिलहाल पश्चिम बंगाल से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इस मामले में अभी भी आगे जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इमरान अली पियाड़ा और इंजामुल के रूप में की गई है। इन आरोपियों के पास से 07 मोबाइल फोन (3 एंड्रॉयड मोबाइल फोन तथा 04 कीपैड मोबाइल फोन) बरामद किए गए। इन मोबाइलों में SIM कार्ड भी लगे हुए थे। इसके अलावा एक राउटर भी बरामद किया गया है।

इस्लामाबाद से चल रहा था कॉल सेंटर

आरोपियों का ग्रुप पाकिस्तान और चीन को साइबर हमले करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस मुहैया करा रहा था। कमिश्नर ने कहा, "ये लोग सिम कार्ड खरीदते थे और उन्हें दूसरे देशों में बैठे लोगों को देते थे। वे चीनी मैलवेयर का इस्तेमाल करते थे और उन्हें इस्लामाबाद से चलाए जा रहे कॉल सेंटर्स से जोड़ते थे। अगर कोई पीड़ित दिए गए लिंक पर क्लिक करता था, तो ये अपराधी गैर-कानूनी तरीके से पैसे ट्रांसफर करने में मदद करते थे।" जांच से पता चला है कि यह स्कैम बहुत बड़े पैमाने पर हो रहा था; इस ग्रुप के खिलाफ भारत के 26 अलग-अलग राज्यों में पहले ही 251 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। उन्होंने साइबर फ्रॉड के लिए 4,500 सिम कार्ड खरीदे थे। उनका कॉल सेंटर इस्लामाबाद से चलाया जा रहा था।

ओटीपी के लिए लेते थे रुपये

कमिश्नर ने आगे बताया कि आरोपी साइबर अपराधियों को OTP (वन-टाइम पासवर्ड) उपलब्ध कराने में शामिल थे। उन्होंने कहा, "उन्होंने अब तक लगभग 21,000 OTP उपलब्ध कराए हैं। पकड़े जाने से बचने के लिए उन्होंने अपना काम टेलीग्राम से हटाकर व्हाट्सएप ग्रुप पर शिफ्ट कर लिया था। आरोपी हर OTP के लिए ₹100 लेते थे। जांच में एक गहरे अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का पता चला है।" पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने अपने नेटवर्क से लैपटॉप और मोबाइल फोन सहित लगभग 10,000 डिवाइस जोड़े थे।

कैसे घटना को देते थे अंजाम

जानकारी के मुताबिक इस प्रकार की धोखाधड़ी में साइबर अपराधी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अथवा किसी सरकारी संस्थान के अधिकारी के रूप में अपनी पहचान प्रस्तुत करते हैं और किसी कंपनी के CEO/Director अथवा अन्य कर्मचारी को व्हाट्सएप या ई-मेल के माध्यम से एक ZIP फाइल भेजते हैं। इस ZIP फाइल में .exe (Executable File) और .dll (System Library File) जैसी हानिकारक/मैलवेयर फाइलें होती हैं। 

जब ऐसी फाइल व्हाट्सएप वेब के माध्यम से कंप्यूटर/लैपटॉप पर चलायी जाती हैं, तो साइबर अपराधी व्हाट्सएप वेब सेशन पर नियंत्रण प्राप्त कर लेते हैं। इसके बाद अपराधी अपना मोबाइल नंबर CEO/Director के नाम से सेव कर लेते हैं और CEO/Director की प्रोफाइल फोटो लगाकर उनकी पहचान की नकल करते हैं। फिर तत्काल वित्तीय लेन-देन की आवश्यकता बताकर कंपनी के Accounts/Finance Department के कर्मचारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए जाते हैं।

CEO/बॉस के वास्तविक मोबाइल नंबर को हटाकर अपराधी का नंबर उसी नाम से सेव कर दिया जाता है, जिससे कर्मचारियों के लिए संदेश की वास्तविकता की पुष्टि करना मुश्किल हो जाता है और वे बिना सत्यापन के पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। इस पूरी आपराधिक गतिविधि के लिए फर्जी/डमी SIM कार्ड का उपयोग किया जाता है, जिनके माध्यम से आवश्यक मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप अकाउंट उपलब्ध कराए जाते हैं। जब साइबर अपराधी संबंधित मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप अकाउंट सक्रिय करने की प्रक्रिया करते हैं, तो आवश्यक OTP डमी SIM कार्ड पर प्राप्त होता है। यह OTP संबंधित व्यक्ति को उपलब्ध कराया जाता है, जिसके आधार पर व्हाट्सएप अकाउंट सक्रिय किया जाता है। इस प्रकार अपराध की पूरी कार्यप्रणाली इस प्रकार संचालित की जाती थी।

आरोपी इमरान अली पियाड़ा की भूमिका

जानकारी के मुताबिक आरोपी इमरान ने B.A. तक की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में Airtel, Jio, Vi तथा BSNL जैसी TSP (Telecom Service Provider) कंपनियों के लिए POS (Point of Sale) के रूप में कार्य कर रहा था। आरोपी ग्राहकों के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट और मोबाइल सेवा प्रदाता की एप्लिकेशन का उपयोग करके ग्राहकों के नाम पर SIM कार्ड प्राप्त करता था। इसके बाद आर्थिक लाभ के लिए, ग्राहकों की जानकारी के बिना, वह दूसरे कंपनी के SIM कार्ड पर मोबाइल नंबर सक्रिय करवाकर डमी SIM कार्ड प्राप्त करता था। ऐसे डमी SIM कार्ड अलग-अलग मोबाइल फोन में डालकर आरोपी उन्हें सक्रिय करता था। इसके बाद इन SIM कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबरों की जानकारी साइबर धोखाधड़ी में शामिल व्यक्तियों को उपलब्ध कराई जाती थी।

जब साइबर अपराधी इन मोबाइल नंबरों पर WhatsApp अकाउंट सक्रिय करने की प्रक्रिया करते थे, तो आवश्यक OTP आरोपी के पास मौजूद डमी SIM कार्ड पर प्राप्त होता था। आरोपी यह OTP संबंधित व्यक्ति को उपलब्ध कराता था, जिसके आधार पर WhatsApp अकाउंट सक्रिय किया जाता था। इस प्रकार आरोपी साइबर अपराधियों को डमी SIM कार्ड, मोबाइल नंबर और WhatsApp अकाउंट उपलब्ध कराता था तथा साइबर धोखाधड़ी के लिए आवश्यक डिजिटल संचार व्यवस्था तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। इसके अतिरिक्त, आरोपी Amazon, Flipkart जैसी ई-कॉमर्स एप्लिकेशन तथा ऑनलाइन गेमिंग एप्लिकेशन के लिए भी डमी SIM कार्ड का उपयोग करता था और OTP बेचता था।

प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया है कि आरोपी ने लगभग पांच वर्षों के दौरान ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग के लिए लगभग 21,000 OTP औसतन ₹100 प्रति OTP की दर से बेचे, जिससे उसे ₹21,00,000 से अधिक की आय हुई। इसके अलावा, WhatsApp अकाउंट सक्रिय करने के लिए लगभग 900 OTP औसतन ₹250 प्रति OTP की दर से बेचे, जिससे उसे ₹2,25,000 से अधिक की आय हुई।

आरोपी इंजामुल की भूमिका

वहीं दूसरे आरोपी इंजामुल ने B.A. तक की शिक्षा प्राप्त की है। जांच के दौरान पाया गया कि आरोपी साइबर धोखाधड़ी में शामिल व्यक्तियों के संपर्क में था और उनके साथ समन्वय करता था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए जाने वाले मोबाइल नंबरों, डमी SIM कार्ड तथा WhatsApp-आधारित संचार प्रणाली के उपयोग में सहायता प्रदान की। जांच के दौरान यह पाया गया कि आरोपी ने डमी SIM कार्ड के माध्यम से सक्रिय किए गए मोबाइल नंबरों/WhatsApp अकाउंट के उपयोग तथा साइबर धोखाधड़ी करने वाले व्यक्तियों के साथ समन्वय में भाग लिया और इस आपराधिक गतिविधि में सहायता की।

साइबर क्राइम से बचने की अपील

CP ने आगे कहा, "हमने अब इन डिवाइस को डीएक्टिवेट कर दिया है। यह उनके इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ा झटका है।" जनता को चेतावनी देते हुए, CP अनुपम सिंह गहलोत ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी, "बिना सही जांच-पड़ताल के किसी भी फाइल को न खोलें और न ही किसी लिंक पर क्लिक करें। ये लिंक गैर-कानूनी तरीके से पैसे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मुख्य साधन हैं।" अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल और संभावित स्थानीय साथियों के बारे में आगे की जांच अभी चल रही है।

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