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नागपुर में क्यों नष्ट की गईं 164 टन थाई मांगुर मछलियां? प्रशासन 3 महीने से कर रहा है कार्रवाई

महाराष्ट्र के नागपुर में फिशरीज डिपार्टमेंट ने बीते 3 माह में अब तक 164 टन थाई मांगुर मछलियों को बरामद कर के नष्ट कर दिया है। आपको बता दें कि थाई मांगुर मछली भारत में प्रतिबंधित है।

Nagpur thai mangur fish destroyed- India TV Hindi
Image Source : REPORTER नागपुर में थाई मांगुर मछली को नष्ट किया गया।

महाराष्ट्र के नागपुर में मत्स्य पालन विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। यहां प्रतिबंधित 164 टन थाई मांगुर मछली को जब्त कर के नष्ट किया गया है। आपको बता दें कि मछली की ये प्रजाति पर्यावरण के साथ साथ इंसानों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। इसलिए पूरी सावधानी के साथ इन्हें डिकंपोज किया गया। सबसे पहले 6 से 8 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया, उनमें मछलियों को डाला गया, उसके ऊपर नमक और ब्लीचिंग पाउडर छिड़का गया। फिर उन्हें मिट्टी डालकर दफनाया गया।

कैसे की गई कार्रवाई?

आपको बता दें कि नागपुर में सिर्फ दो दिन में ही मत्स्य विभाग ने 75 टन थाई मांगुर मछली को नष्ट किया है। फिशरीज डिपार्टमेंट को खबर मिली थी कि नागपुर के दूर-दराज इलाकों में थाई मांगुर मछलियों को गैर-कानूनी तरीके से पाला जा रहा है। सबूत जुटाने के लिए फिशरीज डिपार्टमेंट ने गूगल मैप का सहारा लिया। गूगल मैपिंग के जरिए अवैध तालाबों की सटीक लोकेशन ट्रेस की गई। फिर अवैध कारोबार और बिक्री का पता लगाने के लिए डमी कस्टमर बनाकर भेजे गए। सटीक जानकारी मिलने पर रेड की गई।

तीन महीने से कार्रवाई में जुटा था प्रशासन

महाराष्ट्र के नागपुर में फिशरीज डिपार्टमेंट ने तालाब से थाई मांगुर मछलियों को निकालने के लिए 25 स्थानीय मछुआरों की मदद ली। इस दौरान 27 से 30 तालाबों में जाल बिछाया गया और मछलियों को निकाला गया। मत्स्य विभाग इसके लिए करीब तीन महीने से कार्रवाई में जुटा था। अब तक कुल 164 टन मछलियां जब्त की गई हैं और FIR दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इससे पहले भी प्रशासन द्वारा मांगुर मछलियों को नष्ट करने की कार्रवाई की जाती रही है।

क्यों खतरनाक है थाई मांगुर मछली?

आपको बता दें कि थाई मांगुर मछली पर्यावरण और हेल्थ के लिए बेहद खतरनाक है, जिसकी वजह से NGT और भारत सरकार ने इसकी बिक्री और खरीद पर बैन लगा रखा है। 1960 के दशक में थाई मांगुर प्रजाति की मछलियां थाईलैंड और बांग्लादेश से भारत आई थीं। ये एक मांसाहारी और आक्रामक मछली है जो पानी में मौजूद देसी मछलियों तथा जलीय जीवों को खा जाती हैं। इसके कारण प्राकृतिक जलस्रोतों का संतुलन बिगड़ जाता है। दूसरा इन मछलियों को पालने के लिए सड़ा हुआ मांस, फैक्ट्रियों का कचरा और मृत जानवरों के अवशेष दिए जाते हैं। गंदे पानी और कचरे को खाने के कारण इसके शरीर में लेड, कैडमियम और आर्सेनिक जैसी भारी धातुएं जमा हो जाती हैं। इन मछलियों को खाने से कैंसर, हार्ट डिजीज और कई गंभीर बीमारियां होने का भी खतरा रहता है।

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