मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी कि NCP के भीतर विवाद की खबरें तेज हो गई हैं। पार्टी के संविधान में बदलाव को लेकर नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं, जिससे अंदरूनी कलह की अटकलें बढ़ गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने पार्टी के संविधान में संशोधन का प्रस्ताव रखा था। इसमें अध्यक्ष के साथ-साथ कार्याध्यक्ष को भी अधिक अधिकार देने की बात कही गई थी। इस संबंध में दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर कार्याध्यक्ष के रूप में प्रफुल्ल पटेल को ज्यादा अधिकार देने की मांग की थी।
विवाद बढ़ने के बाद आयोजित हुई बैठक
इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पटेल और तटकरे के पत्र को अमान्य घोषित करने और उसे नजरअंदाज करने की मांग की। इसके बाद पार्टी के भीतर विवाद और गहरा गया। बताया जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद पार्टी में 2 गुट साफ नजर आने लगे हैं। वहीं पार्थ पवार भी इस मामले में सक्रिय हो गए हैं और सूत्रों के अनुसार वे पटेल और तटकरे की सफाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। विवाद बढ़ने के बाद मुंबई के बांद्रा स्थित एमईटी में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में धनंजय मुंडे, हसन मुश्रीफ और छगन भुजबळ समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
सफाई से संतुष्ट नहीं हैं सुनेत्रा और पार्थ?
बैठक में यह तय किया गया कि पूरे मामले पर सुनेत्रा पवार को विस्तार से सफाई दी जाएगी। इसके बाद मंगलवार को प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे और हसन मुश्रीफ ने सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इस सफाई से दोनों पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
पार्थ ने सभी खबरों को निराधार बताया
यह विवाद 16 फरवरी 2026 को भेजे गए पत्र और 10 मार्च को सुनेत्रा पवार के जवाबी पत्र के बाद खुलकर सामने आया। इस पूरे मामले का असर पटेल और तटकरे की छवि पर भी पड़ा है। इस बीच पार्थ पवार ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सभी खबरें निराधार हैं। उन्होंने कहा कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत हैं। पार्थ पवार ने अपने संदेश में कहा कि इन नेताओं का दशकों का समर्पण और नेतृत्व आज भी पार्टी को दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे वरिष्ठ नेताओं को बेवजह विवादों में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है और इसका विरोध होना चाहिए।