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पुणे में दारोगा को दबंगई करना पड़ा महंगा, हुआ निलंबित, कैफे में बदसलूकी का VIDEO हुआ था वायरल

पुणे में एक दारोगा ने कैफे में घुसकर दबंगई की थी और अपने डंडे से काउंटर पर रखे सामान को तोड़ दिया था। इस मामले का वीडियो वायरल होने के बाद दारोगा के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया है।

Pune- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT दारोगा की बदसलूकी का सामने आया था वीडियो

पुणे: पुणे में एक पुलिस सब इंस्पेक्टर (दारोगा) को कैफे में बदसलूकी करना महंगा पड़ गया। दरअसल इसका वीडियो वायरल होने के बाद दारोगा को निलंबित कर दिया गया है। घटना 6 जून की रात की है, जिस पर अब एक्शन हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

पुणे पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डेक्कन पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर संदीप कदम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सब-इंस्पेक्टर पर एक स्थानीय कैफे के कर्मचारियों और ग्राहकों के साथ बदसलूकी करने का आरोप है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद विभाग ने यह सख्त कदम उठाया।

नाइट ड्यूटी के दौरान दारोगा ने की थी बदसलूकी

यह घटना 6 जून की रात की है, जब सब-इंस्पेक्टर संदीप कदम नाइट ड्यूटी पर तैनात थे। रात के करीब 1:45 बजे, वह शिरोल रोड स्थित ‘फ्लाइंग जिप्सी’ कैफे में दाखिल हुए। उस समय कैफे बंद होने की तैयारी में था।

कैफे में लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के अनुसार, सब-इंस्पेक्टर कदम ने कैफे के भीतर जाकर जमकर हंगामा किया। उन्होंने काउंटर पर रखे कॉफी के ग्लास और खाने-पीने के सामान को अपनी लाठी (डंडे) से मारकर नीचे गिरा दिया और कैफे में मौजूद ग्राहकों को उन्होंने तुरंत बाहर निकलने का फरमान सुनाया।

आरोप है कि उन्होंने कैफे के स्टाफ के साथ बेहद आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। वीडियो के सामने आने और वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद, पुलिस विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने और पद का दुरुपयोग करने के आरोप में सब इंस्पेक्टर कदम को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

गौरतलब है कि पुलिस तो नागरिकों की सुरक्षा के लिए होती है, अगर पुलिस ही नागरिकों के साथ बदसलूकी करने लगेगी तो पुलिस विभाग की क्या गुडविल रह जाएगी। आज भी अगर किसी आम नागरिक को कोई परेशानी होती है तो वह पुलिस के पास जाता है क्योंकि उसे ये विश्वास होता है कि पुलिस उसे न्याय दिलाने में मदद करेगी। ऐसे में पुणे जैसी घटनाएं नागरिकों के मन में पुलिस के प्रति विश्वास को कम करती हैं और पुलिस के प्रति डर को बढ़ाती हैं। (रिपोर्ट- समीर शेख)

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