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अरुणाचल प्रदेश में भूकंप के झटके, रिएक्टल स्केल पर 3.5 रही तीव्रता

अरुणाचल प्रदेश में भूकंप के झटके दोपहर दो बजकर 38 मिनट पर महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र धरती की सतह से 10 किमी नीचे था। हालांकि, इससे बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है।

Representative Image- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO प्रतीकात्मक तस्वीर

अरुणाचल प्रदेश में सोमवार (31 मार्च) को भूकंप के झटके महसूस किए गए। दोपहर दो बजकर 38 मिनट पर लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए। रिएक्टल स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.5 आंकी गई। हालांकि, इस भूकंप से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन म्यांमार में भूकंप से आई तबाही के बाद पूरी दुनिया में लोगों के अंदर भूकंप को लेकर डर भरा हुआ है। भूकंप का केंद्र अरुणाचल प्रदेश की शी योमी में धरती की सतह से 10 किलोमीटर नीचे था। भूकंप का केंद्र भारत और चीन की सीमा के बेहद करीब था और इसकी तीव्रता भी काफी कम थी। इस वजह से काफी कम नुकसान हुआ है।

भूकंप तब आते हैं जब पृथ्वी की पपड़ी (क्रस्ट) में तनाव बढ़ता है। पपड़ी बड़ी प्लेटों से बनी होती है जो धीरे-धीरे हिलती है और ये हलचल भूकंप का कारण बनती है। जब भूकंप आबादी वाले इलाके में आता है, तो इससे काफी नुकसान हो सकता है।

भूकंप के प्रति संवेदनशील इलाका है अरुणाचल

भारत का लगभग 59% हिस्सा भूकंप के प्रति संवेदनशील है इसलिए इस मुद्दे पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। बता दें कि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने भूकंप के जोखिम के आधार पर देश को 4 भूकंपीय क्षेत्रों में वर्गीकृत किया है। जोन V सबसे अधिक सक्रिय है, जिसमें हिमालय जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जबकि जोन II सबसे कम प्रभावित है। अरुणाचल प्रदेश भी भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील इलाकों में शामिल है। यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। हालांकि, इनकी तीव्रता कम होने के कारण आमतौर पर ज्यादा नुकसान नहीं होता है। पिछले कुछ सालों में भारत ने कई विनाशकारी भूकंपों का अनुभव किया है।

भारत में आए कुछ बड़े भूकंप

भारत के इतिहास में 1905 का कांगड़ा और 2001 का भुज भूकंप सबसे भयानक भूकंपों में गिने जाते हैं। हिमाचल प्रदेश में 1905 में आए कांगड़ा भूकंप की तीव्रता 8.0 थी, जिसमें 19,800 लोग मारे गए थे। वहीं, 2001 में गुजरात के भुज में 7.9 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने 12,932 लोगों की जान ली और 890 गांवों को तबाह कर दिया।