सोने ने पिछले एक साल में 50.1% का शानदार रिटर्न दिया है, जबकि शेयर बाजार (बीएसई सेंसेक्स) इसी अवधि में 1.2% लुढ़क गया है। सिर्फ पिछले वर्ष ही नहीं, बल्कि तीन, पांच, दस और बीस वर्षों के दौरान भी सोने ने घरेलू शेयर बाजार (सेंसेक्स) की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़त मुख्य रूप से वैश्विक सेंट्रल बैंकों की ऐतिहासिक खरीदारी और मुद्रास्फीति (महंगाई) से सुरक्षा की तलाश के कारण हुई है।
गोल्ड बनाम सेंसेक्स: किसने क्या दिया रिटर्न
| अवधि |
सोने का सालाना रिटर्न |
सेंसेक्स का सालाना रिटर्न |
| 1 वर्ष |
50.1% |
-1.2% |
| 3 वर्ष |
29.7% |
10.7% |
| 5 वर्ष |
16.5% |
16.1% |
| 10 वर्ष |
15.4% |
12.2% |
| 20 वर्ष |
15.2% |
12.2% |
सोना क्यों हो रहा महंगा
जानकारों के मुताबिक, करीब 25% सोने की खरीद अब भी सेंट्रल बैंक कर रहे हैं। वे इसे अमेरिकी ट्रेजरी के विकल्प और व्यापार युद्धों की अनिश्चितता के चलते डाइवर्सिफिकेशन के रूप में देख रहे हैं। सोना अब सिर्फ महंगाई से सुरक्षा का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती और डॉलर में कमजोरी के चलते भी निवेशकों की पसंद बना हुआ है। आगे सोने की कीमत कैसी रहने वाली है, इस पर मार्केट एक्सपर्ट कहते हैं कि हालिया तेजी के बाद सोने में आगे की बढ़त सीमित हो सकती है। फिर भी पोर्टफोलियो में 10-15% गोल्ड अलॉटमेंट की सलाह है। गोल्ड को पोर्टफोलियो का 10% हिस्सा बनाए रखना चाहिए, लेकिन निवेशकों को पिछले साल जैसे ऊंचे रिटर्न की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
सोने-चांदी की कीमत का हाल
कॉमेक्स पर सोने की कीमत हाल ही में $3,715.2 प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच गई, जो अब तक का रिकॉर्ड है। चांदी की कीमत भी $43 पार कर गई है, जो 14 वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है।
इक्विटी में निवेश कितना बेहतर
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, एडलवाइस म्यूचुअल फंड के हिसाब से सोना बनाम सेंसेक्स रेशियो इस समय 0.76 पर है, जो इसके लंबी अवधि के औसत 0.96 से नीचे है। इससे संकेत मिलता है कि अब इक्विटी में निवेश करना अधिक लाभदायक हो सकता है। जानकार कहते हैं कि इतिहास गवाह है कि जब यह रेशियो 0.8 से नीचे गया है, तो अगले तीन वर्षों में सेंसेक्स ने औसतन 25.12 प्रतिशत रिटर्न दिया है, जबकि सोने ने मात्र 7.21 प्रतिशत। सोने में लंबे समय में तो स्थिरता है लेकिन मौजूदा समय में यह ओवरवैल्यूड माना जा रहा है। ऐसे में कीमतों में गिरावट आने पर गोल्ड की खरीदारी करना समझदारी हो सकती है।
(Disclaimer: ये कोई निवेश सलाह नहीं है बल्कि सिर्फ एक जानकारी है। रुपये-पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।)
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