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पोस्ट ऑफिस में 12 महीने की FD पर कितना मिल रहा है ब्याज, वरिष्ठ नागरिकों को कितना मिलेगा रिटर्न

पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं पर मिलने वाला ब्याज, भारत सरकार का वित्त मंत्रालय तय करता है।

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Image Source : INDIA TV पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाएं

भारत का पोस्ट ऑफिस, देश के नागरिकों को डाक सेवाओं के साथ-साथ कई तरह की बैंकिंग सेवाएं भी मुहैया कराता है। पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं पर देश के आम लोग काफी समय से भरोसा करते आ रहे हैं। यही वजह से पोस्ट ऑफिस अपने ग्राहकों को बचत खातों पर शानदार रिटर्न देता है। इतना ही नहीं, पोस्ट ऑफिस की कई स्कीम ऐसी भी हैं, जिसमें बैंकों से भी ज्यादा आकर्षक ब्याज मिलता है। यहां हम जानेंगे कि पोस्ट ऑफिस में 12 महीने की एफडी पर कितना ब्याज मिल रहा है?

12 महीने की एफडी खातों पर कितना ब्याज दे रहा है पोस्ट ऑफिस

देश के तमाम बैंकों की तरह, पोस्ट ऑफिस में भी एफडी खाते खोले जाते हैं। हालांकि, पोस्ट ऑफिस में एफडी को टीडी यानी टाइम डिपोजिट के नाम से जाना जाता है। टाइम डिपोजिट स्कीम, बिल्कुल बैंकों की एफडी स्कीम की तरह ही होती है। इसमें आपको सिर्फ एक बार पैसा जमा करना होता है और फिर मैच्यॉरिटी पर आपको फिक्स ब्याज के साथ पूरा पैसा वापस मिल जाता है।

पोस्ट ऑफिस की स्कीम में वरिष्ठ नागरिकों को कितना मिलेगा रिटर्न

पोस्ट ऑफिस अपने ग्राहकों को 12 महीने यानी 1 साल की एफडी स्कीम पर 6.9 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है। पोस्ट ऑफिस सभी आयु वर्ग के ग्राहकों को बराबर ब्याज देता है। हालांकि, बैंकों में 60 साल या इससे ज्यादा आयु के ग्राहकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में ज्यादा मिलता है। इतना ही नहीं, कई बैंक 80 साल या इससे ज्यादा उम्र के ग्राहकों को वरिष्ठ नागरिकों की तुलना में और भी ज्यादा रिटर्न देते हैं। लेकिन, पोस्ट ऑफिस में वरिष्ठ नागरिकों को कोई विशेष सुविधा नहीं मिलती है। पोस्ट ऑफिस, एफडी खातों पर वरिष्ठ नागरिकों को भी उतना ही ब्याज देता है, जितना सामान्य ग्राहकों को दिया जाता है।

वित्त मंत्रालय तय करता है पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं की ब्याज दरें

बताते चलें कि पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं पर मिलने वाला ब्याज, भारत सरकार का वित्त मंत्रालय तय करता है। वित्त मंत्रालय हर 3 महीनों पर ब्याज दरों की समीक्षा करता है और जरूरत के आधार पर इसमें बदलाव करता है। जबकि, बैंकों द्वारा एफडी खातों पर दिया जाने वाला ब्याज, भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट के आधार पर तय होता है।

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