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पंजाब में बड़े घोटाले का खुलासा, कागज पर बना दिया फर्जी गांव, 55 योजनाएं शुरू कर हड़प लिए 45 लाख रुपये

यह घोटाला 2013 में हुआ था, जब प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री थे। इस समय अकाली दल और बीजेपी की गठबंधन सरकार थी। हालांकि, अब तक इस घोटाले में किसी नेता के शामिल होने की खबर नहीं आई है।

Representative Image- India TV Hindi
Image Source : MATA AI प्रतीकात्मक तस्वीर

पंजाब के फ़िरोज़पुर में सरकारी राशि हड़पने कहा एक अनोखा मामला सामने आया है। मामला 2013 का है, जब सूबे में अकाली-बीजेपी  की सरकार थी। यहां पर सरकारी अधिकारियों ने कागज पर एक फर्जी गांव बसाकर लाखों रुपये का घोटाला कर दिया। फिरोजपुर के इस कागजी गांव का कागज में ही विकास कर के 45 लाख का घोटाला कर दिया, जिसका खुलासा सालों बाद अब आरटीआई के जरिए हुआ है। घोटाला सामने आने के बाद अब प्रशासन की नींद खुली है और इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।

कैसे हुआ घोटाला 

साल 2013 में सरकारी अधिकारियों ने फिरोजपुर के सरहदी इलाके में एक नई पंचायत नवी गट्टी राजोके बनाई गई थी और इसके साथ ही एक फर्जी पंचायत न्यू गट्टी राजो का भी गठन कर दिया गया। फर्जी पंचायत को असली पंचायत से दोगुनी राशि और काम भी आवंटित किया गया। इस फर्जी गांव को केंद्र सरकार से मिलने वाली योजनाओं के 45 लाख रुपये भी आवंटित किए गए। ये पैसे सरकारी अधिकारियों ने हड़प लिए। 

फर्जी गांव में 55 योजनाएं

अधिकारियों ने घोटाला करने के लिए नयू गुट्टी राजो नाम की जो फर्जी पंचायत बनाई थी, उसमें 55 योजनाएं भी शुरू कर दीं। इनमें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की योजनाएं शामिल थीं। इन योजनाओं के जरिए कुल 45 लाख का घोटाला किया गया। वहीं, नवी गट्टी राजोके नाम की जो असली पंचायत बनी थी, उसमें सिर्फ 35 विकास योजनाएं शुरू की गईं। असली गांव को कम ग्रांट मिली, जबकि फर्जी गांव को ज्यादा योजनाएं दी गई, लेकिन असल में इन योजनाओं का पैसा अधिकारियों के पास गया। इस मामले पर अकाली दल का कहना है कि अगर सरकार के पास कोई सबूत है तो कार्रवाई होनी चाहिए। अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत चीमा ने कहा कि अगर सरकार के पास सबूत हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए।

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