नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा और अन्य अधिकारियों के खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है।
मामला सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) के बकाया से जुड़े केस से जुड़ा है।पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरु की थी।
पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी
3 अगस्त को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि पंजाब सरकार अपने सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को DA/DR की सभी लंबित किस्तों का भुगतान करे। हाईकोर्ट ने कहा था कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को DA/DR उसी दर से दिया जाए, जिस रेट से पंजाब में कार्यरत IAS, IPS और IFS अधिकारियों को दिया जा रहा है। इस आदेश को पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
चूकिं राज्य सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया था । हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर पंजाब सरकार के खिलाफ सिविल अवमानना और आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी।
मुख्य सचिव पर लगा था एक लाख का जुर्माना
गौरतलब है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के डीए एरियर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की थी। हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बकाया महंगाई भत्ते (डीए) तथा एरियर भुगतान से जुड़े मामले में पंजाब के मुख्य सचिव पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया था।
इस मामले में जवाब दाखिल ना करने पर पंजाब के मुख्य सचिव पर यह एक्शन हुआ था। इस मौके पर कोर्ट ने नाराजगी भी जताई थी और मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था।
क्या था मामला?
ये पूरा मामला सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के लंबित महंगाई भत्ते और एरियर से संबंधित था, जिसमें याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सरकार ने समय पर डीए और एरियर का भुगतान नहीं किया है। इससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। हाई कोर्ट ने पहले भी इस मामले में सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार ने आदेशों का पालन नहीं किया।
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