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सरकारी सिस्टम से हारा विकलांग, मां और खुद के लिए कलेक्टर से मांगी इच्छामृत्यु; दर्दनाक है इसके पीछे की वजह

विकलांग रमेश ने कहा, मैं अब थक चुका हूं। आदेश के बाद भी तहसीलदार और पटवारी काम नहीं कर रहे। रोज-रोज अपमानित होना पड़ता है। अगर रास्ता नहीं मिलेगा, तो आत्मदाह करने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं है।

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Image Source : REPORTER INPUT बुजुर्ग मां के साथ रमेश।

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के दुर्जनपुरा गांव में 51 वर्षीय विकलांग रमेश कुमार और उनकी 75 वर्षीय बीमार मां केशर देवी अपने घर में कैद हैं। लगभग 50 साल पुराना रास्ता (खसरा नंबर 85, 63, 67) पड़ोसियों के कब्जे और झगड़ों के कारण बंद हो गया है। रमेश दोनों पैरों से अपंग हैं और उनकी मां हृदय रोगी हैं, फिर भी प्रशासनिक आदेशों के बावजूद रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो रहा।

तहसील-कलेक्टर के चक्कर काटे, कोई राहत नहीं

रमेश और उनकी मां को खेत में बने घर से बाहर आने के लिए काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। पीड़ित का कहना है कि उन्हें तहसील-कलेक्टर के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर राहत नहीं मिल रही। 18 जुलाई 2025 को उपखंड अधिकारी (SDM) ने मार्ग को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन पटवारी अभिषेक मीणा द्वारा ऑनलाइन रिकॉर्ड में अभी तक यह दर्ज नहीं किया गया।

Image Source : reporter inputतहसील-कलेक्टर के चक्कर काटते रहे रमेश और उनकी बुजुर्ग मां।

आत्मदाह करने के अलावा कोई विकल्प नहीं- रमेश

हार और मानसिक पीड़ा से परेशान रमेश ने कलेक्टर अरुण गर्ग को इच्छामृत्यु की अर्जी तक दे डाली। रमेश कहते हैं, “अगर रास्ता नहीं मिलेगा, तो आत्मदाह करने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं है।” वहीं उनकी मां केशर देवी ने कहा, “हमारा रास्ता हमारा हक है, फिर भी हमें कैद कर दिया गया है। हमारी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए प्रशासन को संवेदनशील होना चाहिए।”
 
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तुरंत प्रभाव से तहसीलदार को आदेश दिए हैं कि दो दिन के भीतर मार्ग को ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए और रास्ता सुचारू किया जाए।

(रिपोर्ट- अमित शर्मा)

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