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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 90 साल के पूर्व जिला जज से 2.50 करोड़ की ठगी, व्हाट्सऐप पर वीडियो कॉल से शुरु हुआ खेल

90 वर्षीय पूर्व जिला जज को करीब 15 दिन तक यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि वह किसी बड़े हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंस चुके हैं। ठगों ने कानून और जांच एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर ऐसा दबाव बनाया कि पीड़ित ने एक के बाद करोंड़ों रुपये ट्रांसफर कर दिए।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : PIXABAY AND CANVA सांकेतिक तस्वीर

जयपुर में साइबर ठगी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने हवाला लेनदेन में गिरफ्तारी का डर दिखाकर 90 साल के एक पूर्व जिला जज को करीब 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने जाल में फंसाए रखा और उनसे 2 करोड़ 50 लाख 51 हजार रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी और आरबीआई मैनेजर बताया और पीड़ित को लगातार कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी और मुंबई ले जाने की धमकी देकर मानसिक दबाव में रखा।

मामला जयपुर के ज्योति नगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार सी-54, लालकोठी स्कीम निवासी 90 वर्षीय गणपत सिंह भंडारी के साथ यह ठगी हुई। मामले में पूर्व जज के भांजे रविन्द्र सिंह मोहनौत की ओर से पुलिस को रिपोर्ट दी गई है।

व्हाट्सऐप वीडियो कॉल से शुरू हुआ डिजिटल अरेस्ट

पीड़ित के अनुसार 28 जुलाई को उनके व्हाट्सऐप पर वीडियो कॉल आया। वीडियो कॉल करने वाले व्यक्ति ने पुलिस अधिकारी की वर्दी पहन रखी थी। उसने खुद को मुंबई सीबीआई का अधिकारी बताया।
कॉल करने वाले ने पीड़ित को बताया कि मुंबई में 50 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ है और इस मामले में उनके एसबीआई खाते में 40 लाख रुपये आए हैं। इसके बाद उन्हें धमकाया गया कि अगर उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर मुंबई ले जाया जाएगा। परिवार के किसी सदस्य को भी कार्रवाई में शामिल करने की धमकी दी गई। इस तरह ठगों ने शुरुआत में ही पीड़ित के मन में गिरफ्तारी और बदनामी का डर पैदा कर दिया। इसके बाद उनसे लगातार वीडियो कॉल के जरिए संपर्क रखा गया।

खुद को सीबीआई अधिकारी और आरबीआई मैनेजर बताया

ठगों ने अलग-अलग चरणों में अपनी पहचान बदलकर पीड़ित को भरोसे में लिया। कभी खुद को सीबीआई अधिकारी बताया गया तो कभी आरबीआई मैनेजर बनकर बात की गई। पीड़ित को यह विश्वास दिलाया गया कि उनके बैंक खाते किसी गंभीर वित्तीय अपराध की जांच के दायरे में हैं और जांच पूरी होने तक उन्हें अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना होगा।

डिजिटल अरेस्ट के दौरान पीड़ित को लगातार करीब 15 दिन तक निगरानी में रखने जैसा माहौल बनाया गया। उन्हें डराया गया कि किसी भी तरह की जानकारी बाहर देने या परिवार के सदस्यों से बात करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ठग हर कॉल के बाद व्हाट्सएप चैट, कॉल लॉग और अन्य मैसेज डिलीट करने के निर्देश भी देते थे। भय और दबाव के कारण पीड़ित ने रिकॉर्ड डिलीट कर दिए। यही वजह रही कि परिवार को भी काफी समय तक इस ठगी की भनक नहीं लगी।

3 अगस्त से 10 अगस्त के बीच खाते खाली करवाए

ठगों के दबाव में पीड़ित ने 3 अगस्त से 10 अगस्त के बीच अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की। पुलिस को दी गई शिकायत में इन ट्रांजैक्शन का सिलसिलेवार ब्योरा भी दिया गया है। 3 अगस्त 2026 को एक खाते में 22.17 लाख रुपये और दूसरे खाते में 28.34 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। यानी एक ही दिन में कुल 50.51 लाख रुपये ट्रांसफर हुए। इसके बाद 6 अगस्त को तीन अलग-अलग खातों में 40 लाख, 40 लाख और 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। इस दिन कुल 1 करोड़ 10 लाख रुपये की रकम ट्रांसफर हुई।

7 अगस्त को एक खाते में फिर 30 लाख रुपये भेजे गए

10 अगस्त को एक खाते में 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए और उसी खाते में दोबारा 30 लाख रुपये की रकम भेजी गई। इस तरह अलग-अलग तारीखों में हुए ट्रांजैक्शन की कुल रकम 2 करोड़ 50 लाख 51 हजार रुपये तक पहुंच गई।

बैंक खातों में ऐसे पहुंची रकम

3 अगस्त को 22.17 लाख रुपये और 28.34 लाख रुपये दूसरे खाता संख्या में ट्रांसफर किए गए। 6 अगस्त को 40 लाख और 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। 7 अगस्त को फिर 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। 10 अगस्त को 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए और इसी खाते में दोबारा 30 लाख रुपये भेजे गए। इन सभी ट्रांजैक्शन को मिलाकर आरोपियों ने 2 करोड़ 50 लाख 51 हजार रुपये अपने बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

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