जोधपुर के विशेष न्यायालय (पोक्सो कोर्ट) ने एक गंभीर और संवेदनशील मामले में पारिवारिक विश्वास को तार-तार करने वाले आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने आरोपी पर कुल 85 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
क्या है पूरा मामला?
पीपाड़ क्षेत्र के एक गांव निवासी आरोपी ने अपने ही छोटे भाइयों की पत्नियों के साथ अलग-अलग समय पर दुष्कर्म और दुष्कर्म के प्रयास जैसी वारदातों को अंजाम दिया। आरोपी के छोटे भाई की पत्नी और पहली पीड़िता ने सामाजिक लोकलाज के भय से शुरुआत में घटना को छिपाए रखा, लेकिन आरोपी के दुस्साहस ने तब हद पार कर दी जब उसने अपने दूसरे भाई की पत्नी के साथ भी अपराध का प्रयास किया। पीड़िता के शोर मचाने पर आरोपी मौके से फरार हो गया। इस घटना के बाद पहली पीड़िता ने भी अपनी आपबीती अपनी सास को सुनाई तो वह अपने बेटे की इस हरकत से दंग रह गई।
मां ने क्या कहा?
इसके बाद आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया और सुनवाई के दौरान पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका आरोपी की सगी मां की रही, जिन्होंने रिश्तों से ऊपर उठकर न्याय का साथ दिया। मां ने अदालत में अपने बेटे के खिलाफ ठोस और स्पष्ट गवाही दी। उन्होंने कहा कि उनका बेटा आदतन अपराधी है और उसे किसी भी प्रकार की नरमी नहीं दी जानी चाहिए। उनकी इस साहसिक गवाही ने मामले को मजबूत आधार प्रदान किया और अपराध को संदेह से परे साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समाज में न्याय और हिम्मत की मिसाल बनी मां
अदालत ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए धारा 376(2)(एफ) के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना, धारा 376/511 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 354 के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना सुनाया। यह फैसला समाज में न्याय और सत्य की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
(रिपोर्ट- युगावर्त व्यास)
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