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कहीं आपका नोट नकली तो नहीं! ‘फर्जी’ वेब सीरीज देखकर फेक करेंसी छापने वाले गिरोह का पर्दाफाश, कई राज्यों में फैला नेटवर्क

डूंगरपुर में नकली नोट छापने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने अलग-अलग राज्यों से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी नकली नोट छापते थे।

पुलिस हिरासत में आरोपी और नकली नोट छापने वाली मशीन- India TV Hindi
Image Source : REPORTER पुलिस हिरासत में आरोपी और नकली नोट छापने वाली मशीन

राजस्थान के डूंगरपुर में नकली नोट बनाने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। मशहूर वेब सीरीज ‘फर्जी’ देखकर नकली नोट छापने का आइडिया आया और देखते ही देखते युवाओं ने जाली भारतीय मुद्रा का नेटवर्क खड़ा कर लिया। डूंगरपुर पुलिस ने ‘ऑपरेशन नोटफ्लिक्स’ के तहत मास्टरमाइंड समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह के तार राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और छत्तीसगढ़ तक जुड़े हुए थे। 

पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में चलाए गए ‘ऑपरेशन नोटफ्लिक्स’ के तहत पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्यों ने वेब सीरीज ‘फर्जी’ से प्रेरित होकर नकली नोट तैयार करने का काम शुरू किया था।

4 लाख 95 हजार 500 रुपये की जाली मुद्रा जब्त

इस पूरे मामले की शुरुआत 29 सितंबर को हुई, जब डूंगरपुर के माडा स्कूल ग्राउंड से पुलिस ने भावेश खटीक और नयन जोशी को 4 लाख 95 हजार 500 रुपये की जाली मुद्रा के साथ गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुट गई। जांच के दौरान पुलिस के सामने इस गिरोह के काम करने का तरीका उजागर हुआ। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य नकली नोट तैयार करने के लिए डिजिटल फाइलों और विशेष कागजों का इस्तेमाल कर रहे थे। कागज की आपूर्ति और नोटों से संबंधित डिजिटल फाइलें हासिल करने के लिए ऑनलाइन माध्यमों का सहारा लिया जा रहा था।

मास्टरमाइंड समेत छह आरोपी गिरफ्तार

मामले के मुख्य आरोपी रवि कुमार मिश्रा को डूंगरपुर में पुलिस कार्रवाई की भनक लग गई थी, जिसके बाद वह फरार हो गया। वह लगातार अपने ठिकाने और मोबाइल नंबर बदल रहा था। इसके बाद डूंगरपुर साइबर सेल और विशेष टीम ने तकनीकी जांच के आधार पर उसका पीछा किया और करीब 1300 किलोमीटर दूर पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन से उसे गिरफ्तार कर लिया।

वेब सीरीज ‘फर्जी’ से प्रेरित होकर छापने लगा नकली नोट

पुलिस जांच में हरियाणा के अंबाला निवासी आनंद राजपूत की भूमिका भी सामने आई। पुलिस के अनुसार, आनंद ने ही वेब सीरीज ‘फर्जी’ से प्रेरित होकर नकली नोट छापने का विचार विकसित किया था। इसके लिए फोटोशॉप और यूट्यूब की मदद ली गई, जबकि कागज की व्यवस्था ऑनलाइन माध्यमों से की गई।

वहीं, टेलीग्राम पर ‘अंकित पेपर सेलर’ चैनल के जरिए कागज उपलब्ध कराने के आरोपी मोहम्मद आरिफ को उत्तर प्रदेश के कानपुर से गिरफ्तार किया गया। पांच सौ रुपये के नोट से संबंधित डिजिटल फाइल उपलब्ध कराने के आरोपी तरुण मालेकर को छत्तीसगढ़ के दुर्ग से पकड़ा गया। पुलिस ने इस कार्रवाई के लिए राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और छत्तीसगढ़ में दबिश दी।

अलग-अलग राज्यों से आरोपी गिरफ्तार

डूंगरपुर पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ निवासी 25 वर्षीय रवि कुमार मिश्रा, हरियाणा के अंबाला कैंट निवासी 20 वर्षीय आनंद राजपूत, कानपुर निवासी मोहम्मद आरिफ और छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी 27 वर्षीय तरुण मालेकर शामिल हैं। इनके अलावा डूंगरपुर निवासी 23 वर्षीय भावेश खटीक और 19 वर्षीय नयन जोशी को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करने वाली साइबर सेल, विशेष टीम और संबंधित थानों की पुलिस की एसपी मनीष कुमार ने सराहना की है। पुलिस टीमों को पुरस्कृत करने की घोषणा भी की गई है। फिलहाल मामले में अनुसंधान जारी है और पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

फिलहाल डूंगरपुर पुलिस की इस कार्रवाई को नकली नोटों के नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। अब पुलिस की जांच इस बात पर केंद्रित है कि इस गिरोह ने कितनी जाली मुद्रा तैयार की, उसे कहां-कहां खपाया और इस नेटवर्क से अन्य कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।

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