1. Hindi News
  2. धर्म
  3. चाणक्य नीति
  4. Chanakya Niti: इन 3 तरीकों से कमाया गया धन समृद्धि नहीं लाता है दरिद्रता, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती

Chanakya Niti: इन 3 तरीकों से कमाया गया धन समृद्धि नहीं लाता है दरिद्रता, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती

Chanakya Niti: चाणक्य नीति में कमाई के कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताया गया है जो सही नहीं होते। इन तरीकों से कमाया गया धन आपको बरकत नहीं दरिद्रता देता है। आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में।

Chanakya Niti- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV चाणक्य नीति

Chanakya Niti:आचार्य चाणक्य ने नीतिशास्त्र में जीवन के अलग-अलग पहलुओं को छुआ है। नीतिशास्त्र में राजनीति से लेकर अर्थशास्त्र और प्रकृति से लेकर मानव जीवन के विभिन्न पक्षों पर भी आचार्य चाणक्य ने चर्चा की है। उन्होंने धन कैसे कमाना है इस बारे में भी चाणक्य ने नीति शास्त्र में बताया है, और साथ ही कुछ ऐसे तरीकों के बारे में भी बताया है जिनके जरिए कमाया गया धन बरकत की जगह आपको दरिद्रता दे सकता है। आइए अब विस्तार से जानते हैं इसके बारे में। 

धन जो अनैतिक तरीके कमाया गया हो 

चाणक्य नीति के अनुसार, अगर आप अनैतिक तरीकों से धन का अर्जन करते हैं तो उसमें बरकत कभी नहीं आती। यानि आप नियम-कानूनों को तोड़कर अगर धन कमाते हैं तो यह धन आपको दरिद्रता की ओर ले जाता है। अगर आप रिश्वत लेते हैं, बिना पैसों के द्वारा किए जाने वाले काम को भी पैसा लेकर करते हैं तो यह अनैतिक धन है और ऐसा धन कमाने से आपको बचना चाहिए। 

धोखा देकर कमाया गया धन

अगर आप धन कमाने के लिए किसी को धोखा देते हैं या फिर किसी को धोखे में रखते हैं तो ऐसा धन भी आपको समृद्धि नहीं देता। किसी को धोखा देकर कमाया गया धन आपको मानसिक परेशानी तो देता ही है साथ ही धोखे के बारे में यदि पता चल गया तो आपकी मानहानि भी होती है। इसलिए कभी भी किसी को धोखा देकर धन कमाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए। 

चोरी से कमाया गया धन 

आचार्य चाणक्य के अनुसार चोरी से कमाया गया धन भी हमेशा बर्बाद ही होता है। चोरी गया धन न आत्मिक संतुष्टि देता है और ऐसा करने वाला व्यक्ति समाज में भी मान-सम्मान खो देता है। धन की चोरी करने वाले की स्थिति धीरे-धीरे आर्थिक रूप से खराब ही होती है, कभी सुधरती नहीं है। 

चाणक्य नीति का श्लोक

अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दश वर्षाणि तिष्ठति।
प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति।

चाणक्य नीति में दिए गए इस श्लोक का अर्थ है- अन्याय, बेईमानी और गलत तरीकों से कमाया गया धन बस दस वर्ष तक रुकता है। जब ग्यारहवों साल लगता है तो यह धन संपूर्ण रूप से नष्ट हो जाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें:

Jitiya Vrat 2025: जितिया व्रत के नियम क्या हैं? जान लें इस उपवास में क्या करना चाहिए क्या नहीं

Pind Daan Vidhi, Mantra Pdf: पितृ पक्ष में कैसे करें पिंडदान, यहां जानिए स्टेप बाय स्टेप पूरी विधि मंत्र सहित