23 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और रविवार का दिन है। एकादशी तिथि रविवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। 23 अगस्त को शाम 5 बजकर 44 मिनट तक सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। साथ ही रविवार को शाम 5 बजकर 45 मिनट तक मूल नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जाएगा। तो चलिए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं रविवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
23 अगस्त 2026 का पंचांग
- श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि- 23 अगस्त को 2026 को पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 19 मिनट तक
- सर्वार्थसिद्धि योग- 23 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 44 मिनट तक
- मूल नक्षत्र- 23 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 45 मिनट तक
- 23 अगस्त 2026 व्रत-त्यौहार- पुत्रदा एकादशी व्रत
23 अगस्त 2026 का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:51 ए एम से 05:36 ए एम
- प्रातः सन्ध्या- 05:13 ए एम से 06:21 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:16 पी एम से 01:06 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:47 पी एम से 03:38 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:01 पी एम से 07:23 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या- 07:01 पी एम से 08:09 पी एम
- अमृत काल- 10:33 ए एम से 12:21 पी एम
- सर्वार्थ सिद्धि योग 06:21 ए एम से 05:44 पी एम
राहुकाल का समय
- दिल्ली- शाम 05:15 से शाम 06:53 तक
- मुंबई- शाम 05:26 से शाम 07:00 तक
- चंडीगढ़- शाम 05:19 से शाम 06:57 तक
- लखनऊ- शाम 04:59 से शाम 06:36 तक
- भोपाल- शाम 05:10 से शाम 06:46 तक
- कोलकाता- शाम 04:26 से शाम 06:02 तक
- अहमदाबाद- शाम 05:29 से शाम 07:05 तक
- चेन्नई- शाम 04:52 से शाम 06:25 तक
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय- सुबह 05:54 बजे
- सूर्यास्त- शाम 06:52 बजे
पुत्रदा एकादशी
सावन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी व्रत करने का विधान है। इसे पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में इस एकादशी का बड़ा ही महत्व बताया गया है। बता दें कि सालभर में कुल 24 एकादशियां होती है, लेकिन जब अधिकमास या मलमास आता है तो इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। पुत्रदा एकादशी साल में दो बार आती है-एक सावन महीने के शुक्ल पक्ष में और दूसरा पौष मास के शुक्ल पक्ष में। हालांकि इन दोनों ही एकादशियों का समान रूप से महत्व है। यहां एक बात बता दें कि पुत्रदा एकादशी का मतलब केवल पुत्र से नहीं है, बल्कि संतान से है। संतान पुत्र भी हो सकता है और पुत्री भी। जिन दंपतियों की कोई संतान नहीं है उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। इसके अलावा जो व्यक्ति ऐश्वर्य, संतति, स्वर्ग, मोक्ष, सब कुछ पाना चाहता है उसे भी यह व्रत करना चाहिए।
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)
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