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Bhai Dooj Katha: भाई दूज की कथा, जानिए क्यों मनाया जाता है भाई-बहन के स्नेह का ये खास त्योहार

Bhai Dooj ki Katha: दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाने वाला भाई दूज भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और जिम्मेदारी का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती हैं। यह पर्व यमराज और उनकी बहन यमुना के स्नेह से जुड़ा है। जानिए क्यों मनाते हैं ये त्योहार

Bhai Dooj 2025- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK भाई दूज का त्योहार

Bhai Dooj ki Katha: पूरे भारत ने 20 अक्टूबर 2025 को बड़ी ही धूमधाम से दिवाली का त्योहार मनाया। वहीं, 23 अक्टूबर को भाई दूज मनाया जाएगा। यह त्योहार दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाता है, जो भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत बनाने और इस रिश्ते में आई दूरियों और दरार को कम करने का विशेष अवसर होता है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं। यह दिन केवल एक परंपरा नहीं बल्कि स्नेह, विश्वास और पारिवारिक एकता का प्रतीक है। आखिर यह त्योहार क्यों मनाया जाता है।  आइए जानते हैं इसके पीछे की कथा क्या है।  

भाई दूज का महत्व और परंपरा

भाई दूज का यह त्योहार प्रेम, सुरक्षा और जिम्मेदारी की भावना से जुड़ा हुआ है। बहनें इस दिन अपने भाइयों को घर बुलाती हैं। फिर भाई को तिलक लगाकर आरती करती हैं और मिठाई खिलाती हैं।इस अवसर पर भाई बहनों को आशीर्वाद और अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार देते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह पर्व केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और पारिवारिक बंधन का प्रतीक है।

कब मनाया जाएगा भाई दूज 2025

इस साल भाई दूज का त्योहार 23 अक्टूबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा। तिलक का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:19 बजे से 3:35 बजे तक रहेगा। जयोतिषाचार्यों के अनुसार, यह समय भाई-बहन के स्नेह को और शुभ फल प्रदान करने वाला माना गया है।

यमराज और यमुना की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भाई दूज का पर्व यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा है। यमुना अपने भाई यमराज से बार-बार मिलने का आग्रह करती थीं। एक दिन यमराज अचानक से अपनी बहन के घर पहुंचे। जिस दिन यमराम अपनी बहन के घर पहुंचे, वह तिथि कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि थी। भाई के आने से खुश बहन यमुना ने उनका स्वागत कर आरती उतारी और तिलक लगाया।

इसके बाद अपने भाई की पसंद के पकवान बनाकर बड़े प्यार से भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तभी से भाई दूज का त्योहार मनाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी भाई-बहन के प्रेम और आशीर्वाद का प्रतीक है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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