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देवशयनी एकादशी के दिन नहीं करने चाहिए ये काम, जानें क्या करना होगा शुभ

देवशयनी एकादशी की तिथि से भगवान विष्णु 4 माह तक क्षीर सागर में आराम करते हैं और उनका एक अंश पाताल लोक में निवास करता है।

भगवान विष्णु- India TV Hindi
Image Source : META AI भगवान विष्णु

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का अलग महत्व है और सभी एकादशियों में आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष की एकादशी की तिथि काम महत्व और भी ज्यादा है क्योंकि इसी तिथि के बाद संसार का संचालन करने वाले भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि के लालन-पालन का काम भगवान शिव पर आ जाता है। भगवान विष्णु 4 माह तक योग निद्रा में रहते हैं, इस दौरान कोई भी मांगलिक और शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि काम नहीं करना चाहिए। इस दिन व्रत रखकर पूजन करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं। मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने मात्र से जान-अनजाने हुए पाप भी खत्म होते हैं और जातक की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

कब है एकादशी तिथि?

द्रिक पंचांग की मानें तो आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि इस बार 5 जुलाई  की शाम 06.58 बजे लग रही है और 06 जुलाई को शाम 09.14 बजे समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि की मान्यता के कारण यह एकादशी  06 जुलाई को मनाई जाएगी।

एकादशी के दिन क्या करें

देवशयनी एकादशी तिथि के दिन व्रत रहें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें। इस दौरान जो व्रत नहीं हैं वे सात्विक भोजन करें। व्रतधारी या उनके परिजन गरीब या जरूरतमंदों के बीच दान करें, दान में पीली वस्तुएं और केले का दान ज्यादा लाभकारी होगा। इस दिन पूजा के दौरान भगवान विष्णु का मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः" का जप जरूर करना चाहिए।

क्या नहीं करना चाहिए?

देवशयनी एकादशी के दिन किसी को भी बुरा न कहें। कोशिश करें कि आपके मन में बुरे विचार भी न आएं। इसके अलावा, वासनाजनित विचारों को भी अपने मन में न आने दें। इनसे दूर रहने के लिए धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करें या फिर योग ध्यान करें। इस दिन अगर आपके परिवार में किसी ने व्रत रखा है तो मांस-मदिरा से दूर रहें। व्रतधारी को दिन में सोना नहीं चाहिए। इस दिन भूलकर भी तुलसी पर जल न चढ़ाएं क्योंकि मां तुलसी भी भगवान विष्णु के निमित्त व्रत रखती हैं। ऐसे में अगर आपने जल चढ़ाया तो तुलसी मां का व्रत खंडित हो सकता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)