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Dhanteras Story In Hindi: धनतेरस पर जरूर पढ़ें यह कथा, मां लक्ष्मी और यमराज से जुड़ा है इसका गहरा महत्व

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन जहां एक ओर भगवान धनवंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है। तो यहां पढ़िए धनतेरस से जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में।

धनतेरस से जुड़ी पौराणिक कथा- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV धनतेरस से जुड़ी पौराणिक कथा

हिंदू धर्म में धनतेरस का त्योहार अत्यंत माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। इसके अलावा धनतेरस के दिन सोना-चांदी, बर्तन, झाड़ू और अन्य नई चीजें खरीदी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन विधि-विधान के साथ पूजा करने से पूरे साल घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता बनी रहती है। इसके अलावा इस दिन नई चीजें खरीदने से उसमें तेरह गुना फल की वृद्धि होती है। धनतेरस पूजा को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस का दिन धन्वंतरि त्रयोदशी या धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इसके अलावा धनतेरस के दिन यम दीपक जलाने का भी विधान है। तो आइए यहां जानते हैं कि धनतेरस का त्योहार क्यों मनाया जाता है। पढ़िए इससे जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में।

धनतेरस क्यों मनाया जाता है?

पौराणिक कथा के अनुसार, जब समुद्र मंथन हुआ था उस समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुआ थे। वो समय कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि थी। यही वजह है कि इस दिन को धनतेरस या धनत्रयोदशी के रूप में जाना जाता है। भगवान धन्वंतरि को विष्णु जी का अंश माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि हाथों में कलश लेकर प्रकट हुए थे इस वजह से धनतेरस के दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि इससे धन, सौभाग्य, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

धनतेरस से जुड़ी दूसरी पौराणिक कथा

धनतेरस से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, माता लक्ष्मी को मिले एक श्राप के चलते उन्हें 12 वर्षों तक एक किसान की सेवा करनी पड़ी थी। 12 वर्ष के बाद जब उनके जाने का समय आया तो किसान ने उन्हें रोकने की कोशिश की, क्योंकि लक्ष्मी जी के रहते हुए उसके घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं हुई थी। लेकिन लक्ष्मी जी का जाना तो तय था। तब लक्ष्मी जी ने किसान से तेरस यानि त्रयोदशी की रात्रि में घी का दीपक जलाकर कलश में सिक्के भरकर उनका पूजन करने को कहा। माता लक्ष्मी ने किसान से कहा कि कार्तिक माह की त्रयोदशी तिथि को जो व्यक्ति मेरी पूजा करेगा, घर को साफ सुथरा करेगा, मेरे निमित्त घी का दीपक जलाएगा उसके घर में में पूरे वर्ष भर निवास करूंगी। किसान ने माता लक्ष्मी की बातों को माना और तेरस के दिन उनकी पूजा की जिससे किसान के जीवन में कभी धन-धान्य की कमी नहीं हुई। इसलिए आज भी कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर माता की पूजा करने से भक्तों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। 

धनतेरस से जुड़ी तीसरी पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,  एक बार यमराज ने अपने दूतों से पूछा कि क्या कभी मनुष्य के प्राण लेते समय उन्हें दया आई है। एक यमदूत ने बताया कि एक बार ऐसा हुआ जब एक नवविवाहिता अपने पति की मृत्यु पर विलाप कर रही थी, तब उसका हृदय द्रवित हो गया था। कथा के अनुसार, एक दिन हंस नामक राजा शिकार पर गया था और रास्ते में भटक गया था। भटकते-भटकते दूसरे राज्य में चला गया। वहां के शासक हेमा ने पड़ोसी राजा का आदर-सत्कार किया। उसी दिन राजा की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म भी दिया।

ज्योतिषियों ने बताया कि अगर इस बालक का विवाह होता है, तो वह विवाह के चार बाद ही मर जाएगा। तब राजा ने अपने बेटे को यमुना तट पर एक गुफा में रखने का फैसला लिया, ताकि वहां स्त्रियों की परछाईं भी उस पर न पड़ सके। लेकिन ऐसा हो न सका और संयोगवश राजा हंस की बेटी वहां चली गई। ब्रह्मचारी के वहां मौजूद राजकुमार को देख, उस पर मोहित हो गई। दोनों ने गन्धर्व विवाह कर लिया और चार दिन बाद ही राजकुमार की मृत्यु हो गई। तब यमदूत ने कहा कि उस नवविवाहिता का करुण विलाप सुनकर हृदय पसीज गया था।

तब यमदूतों ने पूछा कि ऐसा कोई उपाय है, जिससे अकाल मृत्यु से बचा जा सके। तब यमराज ने कहा कि धनतेरस पर विधि विधान से पूजा-अर्चना और दीपदान करने से अकाल मृत्यु नहीं होती। इसलिए इस दिन यमराज, माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन यम दीपक लगाया जाता है, जिसे ‘यम दीपदान’ कहा जाता है।

इस तरह से धनतेरस का पर्व केवल धन प्राप्ति का नहीं बल्कि आरोग्य, आयु और समृद्धि की कामना का पर्व है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि असली संपत्ति हमारा स्वास्थ्य है। इसलिए इस दिन की पूजा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि जीवन के संतुलन और सुख-शांति का भी प्रतीक है।

​(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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