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Ekadashi Puja Mantra: अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के इस मूल मंत्र का करें जाप, पूरी होगी हर अधूरी इच्छा

Ekadashi Puja Mantra: 13 मई को अपरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। साथ ही एकादशी के दिन विष्णु जी के मूल मंत्र का जाप जरूर करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं।

विष्णु जी पूजा मंत्र- India TV Hindi
Image Source : UNSPLASH विष्णु जी पूजा मंत्र

Ekadashi Vishnu ji Puja Mantra: हर साल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह एकादशी अत्यंत ही फलदायी और पुण्य देने वाली मानी जाती है। एकादशी का व्रत रखने से न केवल आर्थिक तंगी दूर होती है, बल्कि समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने और विशेष मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं। अपरा एकादशी का व्रत करने से लक्ष्मी नारायण की कृपा से जातक के घर-परिवार में सदैव सुख-समृद्धि का वास रहता है। तो आइए जानते हैं कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए किन मंत्रों का जाप करना चाहिए।

अपरा एकादशी पूजा मुहूर्त 2026

पंचाग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 12 मई को दोपहर 2 बजकर 52 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि का समापन 13 मई को दोपहर 1 बजकर 29 मिनट पर होगा। जातक इस समय तक अपरा एकादशी की पूजा कर सकते हैं। वहीं एकादशी के दिन पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 37 मिनट से सुबह 5 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। अपरा एकादशी के दिन पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त नहीं रहेगा। 

विष्णु जी का मूल मंत्र

एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित रहता है। ऐसे में विष्णु के इस मूल मंत्र का जाप करने से जातक की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण हो जाती हैं। अगर आपकी कोई ऐसी इच्छा है जो लंबे समय से अधूरी है तो अपरा एकादशी के दिन पूजा के दौरान भगवान विष्णु के इस मूल मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।  विष्णु जी का मूल मंत्र है- 'ॐ नमोः नारायणाय॥'

एकादशी के दिन विष्णु जी के इन मंत्रों का भी जरूर करें जाप

  1. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
  2. ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
  3. मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
  4. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम् विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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