1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. Teej Sinjara 2025: हरियाली तीज से एक दिन पहले क्यों मनाया जाता है सिंजारा, जानिए इसमें किन-किन सामग्रियों की होती है जरूरत

Teej Sinjara 2025: हरियाली तीज से एक दिन पहले क्यों मनाया जाता है सिंजारा, जानिए इसमें किन-किन सामग्रियों की होती है जरूरत

शादीशुदा महिलाओं के लिए हरियाली तीज का पर्व बहुत मायने रखता है क्योंकि यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस पर्व से एक दिन पहले सिंजारा मनाने की परंपरा है। चलिए जानते हैं सिंजारा क्या होता है और इसका महत्व क्या है।

teej sinjara- India TV Hindi
Image Source : SORA AI तीज सिंजारा साम्रग्री लिस्ट

Hariyali Teej Sindhara 2025: सिंजारा पर्व हरियाली तीज से एक दिन पहले मनाया जाता है। इसे सिंधारा दूज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बहू-बेटियों के घर सिंजारा यानी सिंधारा भेजा जाता है। जिसमें मिठाई, वस्त्र, आभूषण, मेहंदी और श्रृंगार के अन्य सामान शामिल होते हैं। सिंधारा में आई मेहंदी सुहागिने अपने हाथों में रचाती हैं और फिर अगले दिन तीज का व्रत रहती हैं। इस पर्व को श्रृंगार दिवस के नाम से भी जाना जाता है। चलिए आपको बताते हैं सिंजारा में क्या-क्या चीजें होती हैं और कैसे मनाया जाता है ये पर्व।

हरियाली तीज सिंजारा कब है 2025 (Hariyali Teej Sinjara 2025)

सिंजारा का त्योहार इस साल 26 जुलाई 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन श्रावण शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रात 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। सिंजारा के अगले दिन यानी 27 जुलाई को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा।

तीज सिंजारा सामग्री लिस्ट (Teej Sinjara Samagri List)

वस्त्र, हरी चूड़ी, सोने के आभूषण, मांग टीका, काजल, मेहंदी, नथ, बिंदी, सिंदुर, गजरा, कमरबंद, बिछिया, पायल, झुमके, बाजूबंद, अंगूठी, कंघा, घेवर, रसगुल्ला, मावे की बर्फी।

सिंजारा कैसे मनाया जाता है (Sinjara Kaise Manate Hai)

सिंजारा के दिन बहू बेटियों को 9-9 प्रकार के मिष्ठान और पकवान बनाकर खिलाए जाने की परंपरा है। इस दिन महिलाएं सिंजारे में मिली मेहंदी को अपने हाथों में रचाती हैं। सिंधारे में आए कपड़ों और गहनों को महिलाएं हरियाली तीज के दिन पहनती हैं। कई क्षेत्रों में सिंधारे में आए उपहार महिलाएं एक-दूसरे को उपहार स्वरूप भेंट करती हैं। सिंधारा दूज के दिन झूले डाले जाते है। सिंधारा में आई मिठाईयों व अन्य चीजों का बाटा जाता है। फिर शाम के समय देवी पार्वती की पूजा के बाद सिंधारा सास को दे दिया जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें:

सावन के महीने में अगर घर में दिखा जाए ये कीड़ा तो समझ जाएं चमकने वाला है भाग्य

बुध के उदित होते से चमकेगी इन 4 राशियों की किस्मत, चेक करें क्या आपकी राशि है इसमें शामिल