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हरतालिका तीज के दिन रहेगा भद्रा का साया! जानें भगवान शिव और मां गौरी की पूजा का शुभ मुहूर्त

हरतालिका तीज के दिन भद्रा काल भी रहेगा। ऐसे में यहां जानिए कि भद्रा कब समाप्त होगा और हरतालिका तीज की पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त क्या रहेगा।

हरतालिका तीज 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV हरतालिका तीज 2026

सुहागिनों का प्रमुख पर्व हरतालिका तीज 14 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाओं निर्जला उपवास रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करती हैं। इस साल जहां हरतालिका तीज के दिन सोमवार और गणेश चतुर्थी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। वहीं दूसरी ओर  हरतालिका तीज पर भद्रा का भी साया रहेगा। आपको बता दें कि हिंदू धर्म में भद्रा का शुभ समय नहीं माना गया है। इस दौरान पूजा-पाठ और कोई भी मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। तो ऐसे में यहां जानिए कि हरतालिका तीज की पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त क्या रहेगा।

हरतालिका तीज 2026: भद्रा कब समाप्त होगा

पंचांग के अनुसार, 14 सितंबर को भद्रा काल शाम 7 बजकर 20 मिनट पर आरंभ होगा। भद्रा का समाप्त 15 सितंबर को सुबह 6 बजकर 6 मिनट पर होगा। 

क्या हरतालिका तीज की पूजा पर रहेगा भद्रा का साया?

ज्योतिषों के अनुसार, हरतालिका तीज की पूजा पर भद्रा का कोई प्रभाव नहीं पडे़गा। दरअसल यह भद्रा पृथ्वी लोक पर नहीं होगी इसलिए इसका पूजा पर कोई असर नहीं होगा। हरतालिका तीज की पूजा के लिए शाम में सबसे उत्तम मुहूर्त प्रदोष काल का रहता है। बता दें कि जब भद्रा पाताल लोक या स्वर्ग लोक में होती है तो उसका दुष्प्रभाव पृथ्वी लोक पर रहने वाले मनुष्यों पर नहीं पड़ता है।

हरतालिका तीज पर प्रदोष मुहूर्त

प्रदोष काल पूजा का मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट पर प्रारंभ होगा और समाप्त  रात 8 बजकर 22 मिनट पर होगा। व्रती महिलाएं इस मुहूर्त में हरतालिका तीज की पूजा कर सकती हैं। वहीं दिन में हरतालिका तीज का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 26 मिनट से सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। हरतालिका तीज की पूजा सुबह और शाम दोनों समय में किया जाता है।

हरतालिका तीज व्रत का महत्व

हरतालिका तीज के दिन मिट्टी या नदी की बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है और फिर विधिपूर्वक पूजा की जाती है। भगवान शिव को बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, जनेऊ और भस्म अर्पित किया जाता है। वहीं माता पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री (सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी, आलता, चुनरी आदि) चीजें चढ़ाया जाता है। हरतालिका तीज का व्रत करने से जहां विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है। वहीं कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर की प्राप्ति होती है और शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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