श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस साल 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के साथ इस दिन व्रत रखने की भी परंपरा है। जन्माष्टमी का व्रत रखने वालों को इसके नियम और खानपान की जानकारी होना जरूरी है। जन्माष्टमी का व्रत सप्तमी तिथि से शुरू होने वाले नियमों के साथ रखा जाता है और आधी रात को भगवान कृष्ण के जन्म हुआ था, इसलिए निशिता काल में पूजा करके व्रत का पारण किया जाता है। जन्माष्टमी के व्रत में क्या-क्या खा सकते हैं? आइए जानते हैं सबकुछ।
जन्माष्टमी के व्रत में क्या-क्या खा सकते हैं? (Janmashtami Vrat Mein Kya-Kya Kha Sakte Hain List)
व्रत का भोजन बनाते समय रिफाइंड और शुगर की जगह शहद, गुड़ और घी का इस्तेमाल करें। सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का प्रयोग किया जा सकता है।
- साबूदाना: साबूदाना व्रत में खाई जाने वाली लोकप्रिय सामग्री है। इससे साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा और साबूदाना खीर बनाई जा सकती है।
- मखाना: मखाने को हल्का भूनकर खा सकते हैं। दूध के साथ इसकी खीर भी बनाई जा सकती है।
- कुट्टू का आटा: कुट्टू के आटे से व्रत के लिए पूरी, पराठा, चीला या पैनकेक तैयार किए जा सकते हैं।
- सिंघाड़े का आटा: यह व्रत के दौरान इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक आटे में शामिल है, इससे पूरी, रोटी या चीला बनाया जा सकता है।
- सामक के चावल: उपवास में सामान्य चावल के विकल्प के तौर पर सामक के चावल का इस्तेमाल किया जाता है। इससे अलग-अलग व्रत वाले व्यंजन बनाए जा सकते हैं।
- फल: व्रत में केला, सेब, पपीता, अनार और संतरा जैसे फल खाए जा सकते हैं।
- दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स: व्रत में दूध, दही और छाछ का सेवन कर सकते हैं। इनसे कई तरह के व्रत वाले व्यंजन और पेय भी तैयार किए जा सकते हैं।
- नारियल पानी: व्रत के दौरान नारियल पानी लिया जा सकता है।
- ड्राई फ्रूट्स: बादाम, अखरोट, काजू और किशमिश का सेवन कर सकते हैं।
- मूंगफली: मूंगफली का इस्तेमाल व्रत वाले नाश्ते और व्यंजनों में किया जाता है। इससे मूंगफली की चिक्की भी बनाई जा सकती है।
- शकरकंद: व्रत में शकरकंद का सेवन कर सकते हैं।
- आलू: आलू को उबालकर या हल्का पकाकर सेंधा नमक के साथ खाया जा सकता है।
- मिठाइयां: जन्माष्टमी के मौके पर व्रत के नियमों के अनुसार तैयार की गई मिठाइयां खाई जा सकती हैं।
सुबह लें व्रत का संकल्प
जन्माष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। नित्यकर्म से निवृत्त होने के बाद हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान श्रीकृष्ण के व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन मन को शांत रखते हुए भगवान कृष्ण का स्मरण और उनके मंत्रों का जाप करें। शाम को भी स्नान करना चाहिए।
रात में करें कृष्ण पूजा
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्य रात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की रात निशिता काल में पूजा की जाती है। इस दौरान बाल गोपाल को पंचामृत से स्नान कराएं और नए वस्त्र पहनाएं। फूल, चंदन और माला से उनका शृंगार करें और उन्हें पालने में विराजमान कर लोरी सुनाते हुए झूला झुलाएं।
व्रत में इन चीजों से करें परहेज
जन्माष्टमी व्रत में अन्न का सेवन करने से बचना चाहिए। मान्यता के अनुसार इस दिन लौकी, मूली, गाजर और चुकंदर का सेवन भी नहीं करना चाहिए। वहीं, व्रत रखने वाले व्यक्ति को लहसुन-प्याज, मांसाहार और मदिरा से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
निर्जला व्रत के नियम
अगर आप निर्जला व्रत रखते हैं तो इसमें पारण तक पानी पीना भी वर्जित माना जाता है। ऐसे व्रत में किसी भी खाद्य या पेय पदार्थ का सेवन नहीं किया जाता। इसलिए निर्जला व्रत रखने से पहले अपनी क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
कब करें व्रत का पारण
मध्य रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद उनकी पूजा करें और चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत का पारण कर सकते हैं। कुछ लोग अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद पारण करके व्रत पूरा करते हैं। य
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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