भाद्रपद महीने में आने वाले प्रमुख पर्वों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। कान्हा के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले इस पर्व का भक्तों को बेसब्री से इंतजार रहता है। जन्माष्टमी के अवसर पर कई भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को घर लाते हैं। बहुत से लोगों को घर में विराजमान करने के बाद लड्डू गोपाल की सेवा से जुड़े कुछ नियमों के बारे में जानकारी नहीं होती है। ऐसे में बाल गोपाल की सेवा पूर्ण फलदायी नहीं मानी जाती है। इस साल मथुरा-वृंदावन समेत देश भर में 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। ऐसे में अगर आप भी इस दिन लड्डू गोपाल को घर लाने की तैयारी कर रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखें।
लड्डू गोपाल के स्नान-शृंगार से लेकर भोग और रात्रि शयन तक के पूजा नियम
- स्थापना से पहले सफाई: जन्माष्टमी की सुबह स्नान-ध्यान करके सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद मंदिर या पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर उसे पवित्र करें। सिंहासन को साफ करके तैयार रखें। लड्डू गोपाल को घर लाते समय मन में श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक भाव रखें। शांत वातावरण में बाल गोपाल का स्वागत करें।
- स्थापना की सही दिशा: मान्यता के अनुसार लड्डू गोपाल और उनका झूला उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। घर के मंदिर में भी वास्तु के अनुसार उनकी स्थापना करें। इसके लिए उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा को उपयुक्त माना गया है।
- बाल गोपाल का करें अभिषेक: स्थापना के दिन लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराएं। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत तैयार करें। इससे अभिषेक के बाद साफ जल से स्नान कराएं। फिर उन्हें नए और मुलायम पीले वस्त्र पहनाएं।
- ऐसे करें कान्हा का शृंगार: स्नान के बाद बाल गोपाल का सुंदर शृंगार करें। उन्हें मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, कमरबंद, कंगन, पायल और वैजयंती माला पहनाएं। माथे पर केसर, चंदन और अक्षत का तिलक लगाएं। इसके बाद उन्हें सिंहासन पर विराजमान करें।
- प्रिय भोग: लड्डू गोपाल की पूजा में देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। कृष्ण चालीसा का पाठ और मंत्र जाप करें। भोग में माखन-मिश्री, दूध, खीर, ताजे फल और पंचामृत अर्पित करें। मान्यता है कि गोपाल जी को भोग लगाते समय उसमें तुलसी दल जरूर रखना चाहिए। आरती के बाद प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।
- रात्रि शयन: रात को सोने से पहले लड्डू गोपाल को शयन कराना भी जरूरी है। उन्हें हल्के वस्त्र पहनाकर बिस्तर या पालने में लिटाएं। प्रेम से थपकी दें, झूला झुलाएं और लोरी सुनाकर सुलाएं। इसके बाद ही स्वयं सोने जाएं।
इन बातों का रखें ध्यान
- घर में लड्डू गोपाल को विराजमान करने के बाद तामसिक भोजन न करें। बाल गोपाल की सेवा के साथ घर में सात्विक खानपान जरूरी माना है।
- जिस घर में लड्डू गोपाल विराजमान हों, वहां गाली-गलौच या किसी तरह का अशांत माहौल नहीं होना चाहिए। सकारात्मक भाव से पूजा और सेवा करें।
- बाल गोपाल को घर के बच्चे के समान माना जाता है। इसलिए उनकी सेवा भी बच्चे की तरह प्रेम और अपनापन रखते हुए करें। उन्हें अकेला न छोड़ें और उनकी दैनिक जरूरतों का ध्यान रखें।
- घर के मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद ही लड्डू गोपाल की सेवा शुरू करें। मंदिर की सफाई के बाद गंगाजल का छिड़काव करके पूजा स्थान को शुद्ध करें।
- लड्डू गोपाल की सेवा में किसी भी तरह की कोताही न बरतें। स्नान, वस्त्र, शृंगार, भोग, आरती और रात्रि शयन आदि सेवा कार्य श्रद्धा और नियमितता के साथ करें। सेवा में लापरवाही होने पर पूजा अधूरी रहने और सेवा का पूरा फल न मिलने की मान्यता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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