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आज संतान की लंबी आयु के लिए माताएं रखेंगी जितिया का व्रत, जानें प्रदोष काल पूजा और जितिया धागे का महत्व

आज माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। जितिया व्रत के दिन प्रदोष काल में जीमूतवाहन भगवान की पूजा और व्रत कथा सुनने का विधान है।

जितिया व्रत 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV जितिया व्रत 2026

आज यानी 3 अक्टूबर को माताएं अपनी संतान की दीर्घायु की कामना के लिए जितिया यानी जीवित्पुत्रिका का व्रत का व्रत रखेंगी धार्मिक मान्यताएं है कि जितिया का उपवास करने से संतान की आयु लंबी होती है और उनपर आने वाले संकट दूर हो जाते हैं। जितिया का पर्व तीन तक चलता है जिसमें पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन व्रत और तीसरे दिन व्रत का पारण किया जाता है। यह व्रत अत्यंत ही कठिन और नियम-निष्ठा वाला माना जाता है। जितिया व्रत के दिन प्रदोष काल महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा जितिया धागे का भी विशेष महत्व होता है। तो आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता के बारे में।

जितिया व्रत 2026 के दिन प्रदोष काल का समय 

बता दें कि जितिया का व्रत हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि का आरंभ 3 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर हो चुका है। अष्टमी तिथि का समापन 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 5 बजकर 41 मिनट पर होगा। 3 अक्टूबर यानी जितिया के दिन प्रदोष काल शाम 6 बजकर 5 मिनट से रात 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।

जितिया व्रत के दिन प्रदोष काल का महत्व

जितिया व्रत के दिन माताएं निर्जला व्रत रखती हैं और दूसरे दिन शुभ मुहूर्त में पारण करती हैं। जितिया के दिन शाम के समय यानी प्रदोष काल में भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती और व्रत कथा सुना की परंपरा है। जितिया व्रत में चील और सियारिन की कथा भी जरूरी सुनी जाती है।  बता दें कि जितिया के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता और पूजा-पाठ करने का विधान है। लेकिन शाम के समय यानी प्रदोष काल में भी पूजा, आरती और कथा  का श्रवण या पाठ किया जाता है।

जितिया धागे का महत्व

जितिया व्रत में जितिया धागे का विशेष महत्व होता है। यह धागा लाल रंग का होता है और पूजा में चील और सियारिन को यह धागा अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार, संतानों की संख्या के बराबर जितिया धागे चढ़ाए जाते हैं। माताएं अपनी सामर्थ्य अनुसार सोने या चांदी के लॉकेट सहित जितिया अर्पित करती हैं। पूजा संपन्न होने के बाद माताएं इस धागे को अपने गले में धारण करती हैं। इसे संतान की लंबी आयु, सुख और सुरक्षा की कामना से जुड़ी धार्मिक परंपरा माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह धागा संतान को हर तरह की शारीरिक परेशानियों, दुर्घटनाओं, नकारात्मक शक्तियों और अकाल मृत्यु से सुरक्षा प्रदान करता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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