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जन्माष्टमी उपवास खोलने के नियम, रात 12 बजे या अगले दिन सूर्योदय के बाद, कब किया जाता है पारण?

जन्माष्टमी का व्रत भगवान कृष्ण के जन्म के बाद पूजा-अर्चना और भोग लगाने के पश्चात खोला जाता है। कुछ भक्त मध्यरात्रि में प्रसाद ग्रहण करके व्रत पूरा करते हैं, जबकि कई लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं। जानिए इस साल व्रत का पारण समय और व्रत खोलने का सही तरीका।

Janmashtami vrat paran- India TV Hindi
Image Source : PINTEREST जन्माष्टमी व्रत पारण के नियम

दिनभर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहने के बाद जब मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म का क्षण आता है, तो व्रत रखने वाले भक्तों के लिए भी यह पल बेहद खास होता है। लेकिन कृष्ण जन्म के बाद एक सवाल अक्सर उलझन में डाल देता है कि आखिर इसी समय व्रत खोला जाए या अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाए? चलिए जानते हैं रात में जन्माष्टमी पर व्रत खोलने की क्या मान्यता है और उपवास खोलते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

जन्म के बाद व्रत पारण

जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मध्यरात्रि में मनाया जाता है। सनातन धर्म शास्त्रों के मुताबिक, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में रोहिणी नक्षत्र के दौरान भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए रात करीब 12 बजे लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक, शृंगार, पूजन और आरती की जाती है। इसके बाद कान्हा को माखन-मिश्री, पंजीरी और फलों समेत कई चीजों का भोग लगता है।

मध्यरात्रि में खोल सकते हैं व्रत

कई भक्त कृष्ण जन्म और पूजा के बाद रात में उपवास खोल देते हैं। वहीं, कुछ लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करते हैं। इस बार 5 सितंबर 2026 को सुबह 6:08 बजे के बाद व्रत खोलने का समय बताया गया है। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति के बाद पारण करना भी शुभ माना जाता है। यह हर परिवार की परंपरा पर भी निर्भर करता है।

प्रसाद से करें शुरुआत

व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है। चरणामृत या पंचामृत के बाद माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल या अन्य हल्का आहार लें। लंबे समय तक उपवास के बाद अचानक भारी भोजन करने से बचें।

व्रत में क्या खाएं

जन्माष्टमी पर लोग क्षमता और परंपरा अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं। फल, दूध, दही, मखाना और सेंधा नमक जैसी सात्विक चीजें फलाहार में शामिल की जा सकती हैं। अनाज और दालों का सेवन आमतौर पर व्रत में नहीं किया जाता। निर्जला व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन भोजन और पानी से दूर रहते हैं।

रात में किया जाता है जागरण

कृष्ण जन्म तक जागरण करना भी जन्माष्टमी की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। इस दौरान भक्त भजन-कीर्तन, भगवान की लीलाओं का स्मरण करते हुए समय बिताते हैं। मध्यरात्रि में जन्मोत्सव के बाद अभिषेक और आरती करते हैं। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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