Jyeshtha Purnima 2026 Maa Laxmi Aarti, Mantras, Stotram: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाले महामंत्र, आरती और स्तोत्र की पूरी लिस्ट, यहां पढ़ें
Jyeshtha Purnima 2026 Maa Laxmi Aarti, Mantras, Stotram: अगर आप पैसों से जुड़ी समस्या से परेशान हैं तो ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा के दिन रात के समय इन लक्ष्मी मंत्र, स्त्रोत और आरती का पाठ जरूर करें। ऐसा करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

Jyeshtha Purnima 2026 Maa Laxmi Aarti, Mantras, Stotram: रविवार को ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा मनाई जाएगी। पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान-दान आदि का बड़ा ही महत्व है। अगर कहीं गंगा स्नान के लिए जाना संभव है नहीं है तो आप घर पर ही स्नान के पानी में थोड़ा सा गंगा जल या किसी पवित्र नदी का जल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। अगर ये भी संभव नहीं हो तो पवित्र नदियों का ध्यान करते हुए स्नान कर सकते हैं। इसके अलावा पूर्णिमा का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। यदि पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा के साथ ही उनके प्रिय मंत्रों, स्तोत्र और आरती का पाठ किया जाए तो व्यक्ति के जीवन से आर्थिक परेशानियां दूर हो जाती हैं। साथ ही घर का भंडार धन-धान्य से सदैव भरा रहता है।
मां लक्ष्मी की आरती (Maa Laxmi Ki Aarti)
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसदिन ध्यावत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय...
उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय...
तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय...
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय...
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय...
शुभ गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ॐ जय...
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता...
॥ श्रीसिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रम् ॥ (Maa Laxmi Stotram)
॥ विनियोगः ॥
श्री गणेशाय नमः।
ॐ अस्य श्रीसिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रस्य हिरण्यगर्भ ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, सिद्धिलक्ष्मीर्देवता, मम समस्त
दुःखक्लेशपीडादारिद्र्यविनाशार्थं
सर्वलक्ष्मीप्रसन्नकरणार्थं
महाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वतीदेवताप्रीत्यर्थं च
सिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रजपे विनियोगः।
॥ करन्यासः ॥
ॐ सिद्धिलक्ष्मी अङ्गुष्ठाभ्यां नमः।
ॐ ह्रीं विष्णुहृदये तर्जनीभ्यां नमः।
ॐ क्लीं अमृतानन्दे मध्यमाभ्यां नमः।
ॐ श्रीं दैत्यमालिनी अनामिकाभ्यां नमः।
ॐ तं तेजःप्रकाशिनी कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ब्राह्मी वैष्णवी माहेश्वरी करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।
॥ हृदयादिन्यासः ॥
ॐ सिद्धिलक्ष्मी हृदयाय नमः।
ॐ ह्रीं वैष्णवी शिरसे स्वाहा।
ॐ क्लीं अमृतानन्दे शिखायै वौषट्।
ॐ श्रीं दैत्यमालिनी कवचाय हुम्।
ॐ तं तेजःप्रकाशिनी नेत्रद्वयाय वौषट्।
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ब्राह्मीं वैष्णवीं फट्।
॥ ध्यानम् ॥
ब्राह्मीं च वैष्णवीं भद्रां षड्भुजां च चतुर्मुखाम्।
त्रिनेत्रां च त्रिशूलां च पद्मचक्रगदाधराम्॥1॥
पीताम्बरधरां देवीं नानालङ्कारभूषिताम्।
तेजःपुञ्जधरां श्रेष्ठां ध्यायेद्बालकुमारिकाम्॥2॥
॥ अथ मूलपाठः ॥
ॐकारलक्ष्मीरूपेण विष्णोर्हृदयमव्ययम्।
विष्णुमानन्दमध्यस्थं ह्रींकारबीजरूपिणी॥3॥
ॐ क्लीं अमृतानन्दभद्रे सद्य आनन्ददायिनी।
ॐ श्रीं दैत्यभक्षरदां शक्तिमालिनी शत्रुमर्दिनी॥4॥
तेजःप्रकाशिनी देवी वरदा शुभकारिणी।
ब्राह्मी च वैष्णवी भद्रा कालिका रक्तशाम्भवी॥5॥
आकारब्रह्मरूपेण ॐकारं विष्णुमव्ययम्।
सिद्धिलक्ष्मि परालक्ष्मि लक्ष्यलक्ष्मि नमोऽस्तुते॥6॥
सूर्यकोटिप्रतीकाशं चन्द्रकोटिसमप्रभम्।
तन्मध्ये निकरे सूक्ष्मं ब्रह्मरूपव्यवस्थितम्॥7॥
ॐकारपरमानन्दं क्रियते सुखसम्पदा।
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके॥8॥
प्रथमे त्र्यम्बका गौरी द्वितीये वैष्णवी तथा।
तृतीये कमला प्रोक्ता चतुर्थे सुरसुन्दरी॥9॥
पञ्चमे विष्णुपत्नी च षष्ठे च वैष्णवी तथा।
सप्तमे च वरारोहा अष्टमे वरदायिनी॥10॥
नवमे खड्गत्रिशूला दशमे देवदेवता।
एकादशे सिद्धिलक्ष्मीर्द्वादशे ललितात्मिका॥11॥
एतत्स्तोत्रं पठन्तस्त्वां स्तुवन्ति भुवि मानवाः।
सर्वोपद्रवमुक्तास्ते नात्र कार्या विचारणा॥12॥
एकमासं द्विमासं वा त्रिमासं च चतुर्थकम्।
पञ्चमासं च षण्मासं त्रिकालं यः पठेन्नरः॥13॥
ब्राह्मणाः क्लेशतो दुःखदरिद्रा भयपीडिताः।
जन्मान्तरसहस्रेषु मुच्यन्ते सर्वक्लेशतः॥14॥
अलक्ष्मीर्लभते लक्ष्मीमपुत्रः पुत्रमुत्तमम्।
धन्यं यशस्यमायुष्यं वह्निचौरभयेषु च॥15॥
शाकिनीभूतवेतालसर्वव्याधिनिपातके।
राजद्वारे महाघोरे सङ्ग्रामे रिपुसङ्कटे॥16॥
सभास्थाने श्मशाने च कारागेहारिबन्धने।
अशेषभयसम्प्राप्तौ सिद्धिलक्ष्मीं जपेन्नरः॥17॥
ईश्वरेण कृतं स्तोत्रं प्राणिनां हितकारणम्।
स्तुवन्ति ब्राह्मणा नित्यं दारिद्र्यं न च वर्धते॥18॥
या श्रीः पद्मवने कदम्बशिखरे राजगृहे कुञ्जरे
श्वेते चाश्वयुते वृषे च युगले यज्ञे च यूपस्थिते।
शङ्खे देवकुले नरेन्द्रभवनी गङ्गातटे गोकुले
सा श्रीस्तिष्ठतु सर्वदा मम गृहे भूयात्सदा निश्चला॥19॥
॥ इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे ईश्वरविष्णुसंवादे
दारिद्र्यनाशनं सिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
मां लक्ष्मी के चमत्कारी महामंत्र (Maa Laxmi Mantras)
पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी के इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करने से आर्थिक तंगी से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है।
- लक्ष्मी बीज मंत्र (आर्थिक उन्नति के लिए)- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।
- अचानक धन लाभ के लिए मंत्र- ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः।
- कर्ज मुक्ति के लिए मंत्र- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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