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Maha Shivratri Special: भगवान शिव के गले में कौनसा सांप लिपटा रहता है? पढ़िए महादेव के गले में नाग पहनने की पौराणिक कथा

Maha Shivratri 2026: महादेव का स्वरूप भी सभी देवताओं से बिल्कुल अलग है। उनके गले में सांप लिपटा, सिर पर त्रिनेत्र, हाथों में त्रिशुल-डमरू, वाहन नंदी और तन पर भस्म लगा हुआ है। शिवजी के इस रूप के पीछे कई वजह छिपी हुई है।

महाशिवरात्रि 2026- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK महाशिवरात्रि 2026

Maha Shivratri Special: भगवान शिव का स्वरूप सभी देवताओं से बिल्कुल अलग है। जहां अन्य देवताओं के के शरीर पर सोना, हीरा और अन्य कीमती अभूषण रहते हैं। वहीं भगवान शिव के शरीर पर भस्म और गले में सांप लिपटा रहता है। महादेव को प्रसन्न करने के लिए छप्पन भोग या कठिन तप, व्रत करने की जरूरत नहीं पड़ती है। भोलेनाथ एक लोटा जल और कुछ बेलपत्र में ही प्रसन्न हो जाते हैं। आज हम महाशिवरात्रि स्पेशल में जानेंगे कि आखिरी भगवान शिव ने एक नाग को अपने गले का हार क्यों बनाया। इसके साथ ही यह भी जानेंगे कि शिवजी के गले में लिपटे सांप का क्या नाम है। 

भगवान शिव के गले में सांप का नाम क्या है?

भगवान शिव के गले में लिपटे सांप का नाम वासुकी है, उन्हें नागों का देवता कहा जाता है। नागराज वासुकी को शेषनाग का भाई माना जाता है। नागों के देवता माने जाने वाले नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे।  उन्हें शिवजी के प्रिय भक्त और सेवक के रूप में जाना जाता है। 

भगवान शिव ने अपने गले में क्यों पहना था सांप?

पौराणिक कथा के अनुसार, नाग वासुकी को एक तरफ से देवताओं ने जबकि दूसरी ओर से असुरों ने पकड़ा हुआ था। समुद्र मंथन के दौरान कई चीजें निकली थी जिसका वितरण असुरों और देवताओं के बीच किया गया था। वहीं समुद्र मंथन से विष भी निकला था और संसार को बचाने के लिए उस विष को शिवजी ने ग्रहण किया था। समुद्र मंथन के दौरान नागराज वासुकी बुरी तरह घायल हो गए थे, तब शिवजी ने उनकी भक्ति को देखकर उन्हें अपने गले में स्थान दिया। 

महाशिवरात्रि 2026

हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है। इस साल 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर होगा। चतुर्दशी तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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