नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा की आठवीं शक्ति माता महागौरी की पूजा की जाती है। इस तिथि को महाष्टमी या दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत, सुंदर और गौर वर्ण का है। ऐसे में उनकी पूजा में फूलों और रंगों का विशेष महत्व माना जाता है। आइए जानते हैं नवरात्रि की महाष्टमी की देवी महागौरी का प्रिय पुष्प कौन-सा है और महाष्टमी पर किस रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
मां महागौरी का दिव्य स्वरूप
मां महागौरी को दुर्गा माता की आठवीं शक्ति माना जाता है। उनका स्वरूप शांत, सौम्य और अत्यंत सुंदर है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माता चार भुजाओं वाली हैं। उनके हाथों में त्रिशूल और डमरू सुशोभित हैं, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वर मुद्रा में रहते हैं। उन्हें पवित्रता, करुणा और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। भक्त महाष्टमी पर उनकी पूजा कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।
मां महागौरी का प्रिय रंग
महागौरी की पूजा में सफेद रंग का विशेष महत्व बताया जाता है। सफेद रंग शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक है। मां के गौर वर्ण से भी इस रंग का संबंध माना जाता है। वहीं, लाल रंग को शुभता का प्रतीक माना जाता है। महाष्टमी पर पूजा के लिए सफेद या लाल रंग के कपड़े पहन सकते हैं। इस दिन साफ-सुथरे और सादे वस्त्र पहनकर श्रद्धापूर्वक माता की आराधना करना शुभ माना जाता है।
माता को पसंद है मोगरे का फूल
मां महागौरी की पूजा में मोगरे का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसकी सुगंध और सफेद रंग माता के शांत एवं निर्मल स्वरूप से मेल खाते हैं। महाष्टमी पर पूजा की थाली में मोगरे के फूल शामिल कर सकते हैं। हालांकि, पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और भक्ति का भाव है।
मां महागौरी का भोग
मां महागौरी को नारियल और नारियल से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित करने की परंपरा है। भक्त माता को नारियल की बर्फी और लड्डू भी चढ़ाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। महाष्टमी पर मां महागौरी की आराधना में पूजा की परंपराओं का ध्यान रखें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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