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माता महागौरी की कथा, नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर करें इसका पाठ, बरसेगी माता की कृपा

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Oct 17, 2026 05:00 pm IST,  Updated : Oct 17, 2026 05:00 pm IST

नवरात्रि के आठवें दिन दुर्गा माता के अष्टम स्वरूप माता महागौरी की पूजा की जाती है। माता की पूजा के साथ ही आपको कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। आइए जान लेते हैं माता महागौरी की कथा।

Mata Mahagauri Ki Katha- India TV Hindi
माता महागौरी की कथा Image Source : PINTEREST

शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026 को है और इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी की पूजा की जाएगी। माता श्वेत वर्ण की हैं इसलिए माता को महागौरी कहा जाता है। माता की पूजा करने से भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं और साथ ही रोग-दोष से भी मुक्ति मिलती है। माता महागौरी राहु ग्रह को भी नियंत्रित करती हैं इसलिए इनकी पूजा करने से राहु के बुरे प्रभाव भी दूर होने लगते हैं। नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी की पूजा के साथ ही कथा का पाठ भी आपको अवश्य करना चाहिए। आइए जान लेते हैं माता महागौरी की कथा क्या है।  

माता महागौरी की कथा 

शिव पुराण में कथा के अनुसार, भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने कठोर तप किया था। कई वर्षों तक तप करने के बाद भी जब भगवान शिव प्रसन्न नहीं हुए तो अंत में माता ने अन्न-जल का भी त्याग कर दिया। माता की तपस्या इतनी कठोर थी कि समय के साथ उनका पूरा शरीर मुरझाने लगा उनका गौर वर्ण भी काला पड़ने लगा। माता का तप कई वर्षों तक चला और अंत में भगवान शिव ने दर्शन दिए। पार्वती की तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न थे और उन्होंने पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। माता को वर देने के बाद भगवान शिव ने अपनी जटाओं में स्थित गंगा के पवित्र जप से माता पार्वती को स्नान करवाया। गंगा स्नान के प्रभाव से माता का रूप फिर से श्वेत और कांतिमय हो गया। ऐसा माना जाता है कि गंगा स्नान करने के बाद माता पार्वती की रौशनी चारों दिशाओं में फैल गई। इसलिए माता पार्वती के इस रूप को महागौरी नाम दिया गया। माता की पूजा से आत्म ज्ञान और ऊर्जा की प्राप्ति होती है। 

मार्कण्डेय पुराण के पांचवें अध्याय में वर्णित एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार शुंभ-निशुंभ नामक दैत्यों के अत्याचार से त्रस्त होकर सभी देवता हिमालय पर गए और उन्होंने माता पार्वती की स्तुति की। इस दौरान माता पार्वती गंगा स्नान कर रही थीं। देवताओं की पुकार को सुनकर माता के शरीर से एक दिव्य और कांतिमय देवी प्रकट हुईं, इन्हीं देवी को महागौरी और कौशिकी कहा गया। महागौरी ने शुंभ-निशुंभ का वध कर देवताओं को उनके प्रकोप से बचाया था। 

नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि कन्या पूजन कब और कैसे करना है तो इस बारे में विस्तार से हमारी वेबसाइट पर लेख पढ़ सकते हैं। 

 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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