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नवरात्रि में कन्या पूजन कब किया जाएगा? नोट कर लें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Oct 14, 2026 03:16 pm IST,  Updated : Oct 14, 2026 03:18 pm IST

नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इसे कंजक पूजन और कुमारी पूजन के नाम से भी जाना जाता है। जानिए इस नवरात्रि कन्या पूजन कब किया जाएगा।

kanya pujan kab hai 2026- India TV Hindi
कन्या पूजन कब है 2026 Image Source : INDIA TV

वैसे तो धार्मिक ग्रन्थों में, नवरात्रि के सभी नौ दिनों में कन्या पूजन का सुझाव दिया गया है। लेकिन अधिकांश लोग नवरात्रि की अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन करते हैं। कहते हैं कन्या पूजन से माता शीघ्र ही प्रसन्न हो जाती हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। अब सवाल ये आता है कि इस साल कन्या पूजन कब किया जाएगा और कन्या पूजन का सही तरीका क्या है। यहां हम इसी बारे में आपको विस्तार से बताएंगे।

कन्या पूजन कब है 2026

विशेष रूप से कन्या पूजन अष्टमी और नवमी तिथि पर किया जाता है। अगर आप अष्टमी पर कन्या पूजन करते हैं तो आप 18 अक्टूबर को माता महागौरी की पूजा के बाद कन्या पूजन कर सकते हैं। वहीं अगर आप नवमी को कन्या पूजन करते हैं तो आप 19 अक्टूबर को कन्याओं को भोजन करा सकते हैं। पंचांग अनुसार दोनों ही दिन कन्या पूजन के लिए शुभ है।

कन्या पूजन कैसे करते हैं?

  • कन्या पूजन 2 से 10 साल तक की कन्याओं का किया जाता है।
  • कन्या पूजन के लिए कन्याओं को एक दिन पहले ही निमंत्रण भेज दिया जाता है।
  • फिर कन्या पूजन के दिन पहले माता रानी की विधि विधान पूजा की जाती है।
  • फिर हवन किया जाता है।
  • इसके बाद घर में जब कन्याएं आती हैं तो सबसे पहले उनके पैर धुलाए जाते हैं।
  • फिर उन्हें बैठने के लिए आसन दिया जाता है।
  • फिर कन्याओं के माथे पर तिलक लगाया जाता है।
  • फिर हाथ में कलावा बांधा जाता है।
  • फिर कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का भोग लगाया जाता है।
  • जब कन्याएं भोजन कर लेती हैं फिर उन्हें कुछ न कुछ गिफ्ट दिया जाता है।
  • इसके बाद अंत में कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। 

कन्या पूजन में कम से कम एक लड़के को बिठाना क्यों जरूरी है?

कन्या पूजन में एक लड़के को बैठाना और भोजन कराना इसलिए जरूरी माना जाता है क्योंकि उसे भगवान भैरव या बटुक भैरव का रूप माना जाता है। कहते हैं मां दुर्गा की पूजा या साधना तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक उनकी पूजा के साथ भैरव बाबा की आराधना न की जाए। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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