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महेश नवमी जून में मनाई जाएगी इस दिन, जान लें तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

महेश नवमी माहेश्वरी समाज के लिए बेहद खास है, माना जाता है कि भगवान शिव और मां पार्वती के आशीर्वाद से इसी तिथि पर इस समाज की उत्पत्ति हुई थी।

भगवान शिव और मां पार्वती- India TV Hindi
Image Source : META AI भगवान शिव और मां पार्वती

हिंदू धर्म में महेश नवमी को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है, यह तिथि भगवान शिव और मां पार्वती के दिव्य स्वरूप को समर्पित है। यह त्योहार मुख्य रूप से माहेश्वरी समाज द्वारा बड़े ही उत्साह, भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाता है। पौराणिक कथाओं की मानें तो इस दिन माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए यह पर्व उनके लिए बेहद खास हैं। हर साल ज्येष्ठ माह से शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। 

कब मनाई जाएगी महेश नवमी?

हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल यह महेश नवमी 4 जून को मनाई जाएगी। नवमी की तिथि 3 जून 2025 की रात 09.56 बजे शुरू होगी और 4 जून 2025 की रात 11.54 बजे खत्म होगी। चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि को महत्व देते हैं इसलिए यह पर्व 4 जून को ही मनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त इस पर्व के दिन ही रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा, जो पूजा और अन्य धार्मिक कामों के लिए बेहद शुभ है।

महेश नवमी का महत्व

पौराणित कथा के मुताबिक, इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती ने ऋषियों के श्राप से पत्थर बने हुए 72 क्षत्रियों को श्राप मुक्त कर नया जीवनदान दिया था। साथ ही उन्हें आशीर्वाद देते हुए भगवान शिव ने कहा था कि आज से उनका वंश माहेश्वरी कहलाएगा। इस प्रकार यह दिन माहेश्वरी समाज के लिए वंशोत्पत्ति का प्रतीक माना गया है।

क्या है पूजा विधि?

इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें। फिर घर के मंदिर को साफ करें और जल छिड़क कर पवित्र करें। अब भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा को गंगा जल से स्नान कराएं और उन्हें पूजा स्थल पर स्थापित करें। इसके बपाद उन्हें गंगाजल, कुमकुम, चंदन, अक्षत, सफेद फूल, बिल्वपत्र, भांग और धतूरा चढ़ाएं। अभ भगवान और माता जी को खीर और सफेद मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद प्रतिमा के सामने एक दीपक जलाएं और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप जपें। साथ ही महेश नवमी की व्रत कथा का पाठ करें और भगवान शिव और मां पार्वती की आरती करें। अंत में भगवान के सामने क्षमा प्रार्थना भी करें।

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