1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. Pradosh Vrat 2026 Date: मई का पहला प्रदोष व्रत कब? पंचांग के अनुसार जानें पूजा का सबसे सटीक समय

Pradosh Vrat 2026 Date: मई का पहला प्रदोष व्रत कब? पंचांग के अनुसार जानें पूजा का सबसे सटीक समय

May Pradosh Vrat 2026 Date: अगर आप भी प्रदोष की व्रत की डेट को लेकर कंफ्यूज है तो यहां जानिए सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त। आपको बता दें कि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मई 2026 प्रदोष व्रत- India TV Hindi
Image Source : PEXELS मई 2026 प्रदोष व्रत

May Pradosh Vrat 2026 Date and Muhurat: प्रदोष का व्रत भगवान शिव को समर्पित है। प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष व्रत सप्ताह के जिस दिन पड़ता है उसका नाम उसी वार के हिसाब से रखा जाता है और उसका महत्व भी अलग-अलग होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा मिलती है। महादेव की कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत को सबसे उत्तम माना गया है। तो अगर आप भी भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो प्रदोष का व्रत जरूर रखें। तो चलिए जानते हैं मई का पहला प्रदोष व्रत कब है।

मई 2026 का पहला प्रदोष कब है?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 14 मई को सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि का समापन 15 मई को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होगा। इस माह का पहला प्रदोष व्रत 14 मई 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।  गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे 'गुरु प्रदोष व्रत' कहा जाएगा। 

प्रदोष व्रत पूजा शुभ मुहूर्त

गुरु प्रदोष की पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 50 मिनट से रात 9 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।  भक्तों को भगवान शिव की आराधना के लिए करीब 2 घंटे 12 मिनट का समय मिलेगा। आपको बता दें कि प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा शाम के समय (सूर्यास्त के आसपास) ही फलदायी होती है। मुहूर्त बीत जाने के बाद की गई पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता इसलिए समय का विशेष ध्यान रखें।

गुरु प्रदोष का महत्व

जब प्रदोष का दिन गुरुवार को पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष के नाम से जाना जाता है। गुरु प्रदोष को बृहस्पति प्रदोष भी कहा जाता है। भगवान शिव को तो यह दिन प्रिय है ही लेकिन देवगुरु बृहस्पति से संबंधित होने के कारण इस दिन व्रत करने से ज्ञान, शिक्षा, धन, धर्म और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु प्रदोष का व्रत करने से न केवल शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, बल्कि व्यक्ति के मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा में भी भारी वृद्धि होती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें:

Vat Savitri Puja Samagri List 2026: वट सावित्री व्रत पर चाहिए होंगी ये चीजें, अभी नोट कर लें पूरी पूजन सामग्री लिस्ट