हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन व्रत रख कर भगवान विष्णु की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति पर नारायण की विशेष कृपा बरसती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। प्रत्येक एकादशी के दिन विष्णु जी के साथ मां लक्ष्मी की भी आराधना अवश्य करें। ऐसा करने से धन-धान्य में बरकत होती है।
हर माह में दो बार एकादशी का व्रत रखा जाता है एक शुक्ल और दूसरा कृष्ण पक्ष में। सभी एकादशियां महत्वपूर्ण मानी जाती है लेकिन भाद्रपद महीने में आने वाली एकादशी का खास महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री विष्णु शयन शैय्या पर सोते हुए करवट लेते हैं। बता दें कि अभी भगवान विष्णु को शयनकाल चल रहा है और नारायण देवउठनी एकादशी के दिन योग निद्रा से जागेंगे। इस अवधि को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है। तो चलिए अब जानते हैं कि इस साल परिवर्तिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा और मुहूर्त, पारण का समय क्या रहेगा।
परिवर्तिनी एकादशी 2026 डेट
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 21 सितंबर को रात 8 बजे होगा। एकादशी तिथि का समापन 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026 को किया जाएगा।
परिवर्तिनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
परिवर्तिनी एकादशी व्रत के दिन पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से सुबह 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से दोपहर 55 मिनट तक रहेगा। वहीं गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 35 मिनट पर आरंभ और समाप्त शाम 6 बजकर 59 मिनट पर होगा। सायाह्न संध्या मुहूर्त शाम 6 बजकर 35 मिनट से शाम 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
परिवर्तिनी एकादशी 2026 पारण का समय
एकादशी व्रत में पारण का विशेष महत्व होता है और मुहूर्त देखकर ही व्रत खोला जाता है। परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण 23 सितंबर 2026 को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ समय 23 सितंबर को सुबह 6 बजकर 27 मिनट से सुबह 8 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय रात 10 बजकर 50 मिनट रहेगा। माना जाता है कि एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के अंदर न करना पाप करने के समान होता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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